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शिव मंदिरों पर उमडे़गा आस्था का सैलाब

Sun, 24 Jul 2016 11:40 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, हमीरपुर
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सरीला स्थित शल्लेश्वर मंदिर का भव्य द्वार। - फोटो : अमर उजाला
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सावन के पहले सोमवार को जिले भर के शिवमंदिरों में आस्थावानों का जमावड़ा सुबह से ही शुरू हो जाएगा। शिवमंदिरों में होने वाली भक्तों की भीड़ देखते हुए नगर पालिका ने मंदिरों सहित जाने वाले रास्तों में सफाई कार्य शुरू करा दिया है। सोमवार को होने वाली भीड़ के मद्देनजर रविवार को पुलिस ने शिव मंदिरों में पहुंचकर जायजा लिया।
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सावन का महीना लगते ही शिवमंदिराें में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। जिसमें सोमवार को सबसे अधिक भीड़ पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचती है। वहीं मंदिरों के  पुजारी और देखरेख में लगे आस्थावानों ने सावन में भीड़ को देखते हुए मंदिरों की सफाई व साजसज्जा पूरी करा ली है। पहले सोमवार को शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगेगा।

तड़के से ही लोग शिवमंदिराें में पहुंचकर पूजा अर्चना शुरू कर देंगे। मुख्यालय में संगम तट स्थित संगमहेश्वर मंदिर, पातालेश्वर मंदिर, चौरादेवी मंदिर आदि प्रमुख मंदिरों में पूजा अर्चना का क्रम चलेगा। पातालेश्वर मंदिर के महंत सेवादास बीते दो साल से भोले शंकर की सेवा कर रहे हैं।
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कहते हैं कि सावन को देखते उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर मंदिर की सफाई व्यवस्था कराई है। वहीं मेरापुर गांव स्थित संगमहेश्वर मंदिर होने पर ग्राम पंचायत ने  मार्ग की सफाई कराई है। प्रधान प्रतिनिधि गुड्डू सचान ने बताया कि यमुना पुल से लेकर मंदिर तक जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले नालों की सफाई करा दी है ताकि रास्ते में जलभराव न हो।

सरीला कस्बे के मध्य ऊंचाई वाले इलाके में बना प्राचीन शिवालय शल्लेश्वर मंदिर का निर्माण व इतिहास आज तक उजागर नहीं हो सका है। चंदेलकालीन मंदिर व मठों की तर्ज पर पत्थर के शिलापटों से बने इस मंदिर को भी चंदेलकालीन ही माना जाता है। मंदिर के गर्भ में भारी भरकम शिवलिंग स्थापित है।

इस मंदिर के बारे में यह भी किवदंती है कि कस्बा प्राचीन काल में राजा शल्य की राजधानी थी। मंदिर का रखरखाव करने वाली श्री शल्लेश्वर मंदिर समिति ने इस मंदिर का नए लुक में भव्य निर्माण करा दिया है और अनवरत निर्माण कार्य जारी रहता है। सावन के महीने में दूर दराज से कांवरिया आकर जलाभिषेक करते हैं।

समिति के कोषाध्यक्ष रतन गुप्ता कहते हैं कि मंदिर बहुत प्राचीन है। इसका निर्माण किसने और कब कराया इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। सब कुछ गर्त में है। बुजुर्ग तरह तरह की बातें बताया करते हैं। इसे कोई चंदेलकालीन मंदिर, तो कोई इसे राजा शल्य की राजधानी का मंदिर बताते हैं।
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