हमीरपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। चंदूपर ग्राम पंचायत के मजरा गंगवा डेरा में प्राथमिक विद्यालय दो साल से भवनविहीन है। पेड़ की छांव में कक्षा लग रही है। पुरानी इमारत को 2024 में तकनीकी टीम ने असुरक्षित घोषित किया था। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने भवन की नीलामी कर कबाड़ में बेच दिया। वहीं नई इमारत के लिए प्रस्ताव कागजों में अटका है।
विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक कुल 36 बच्चे पंजीकृत हैं जबकि प्रधानाध्यापक रघुराज कुटार, शिक्षामित्र कमलेश कुमार व संतोषी देवी की तैनाती है। पुराना भवन बिकने के बाद गांव के भूरे ने अपने मकान का एक हिस्सा बच्चों की पढ़ाई के लिए दिया था जिसमें वर्ष 2025 तक पढ़ाई चली। घर में विवाह समारोह के कारण भूरे ने घर खाली करा लिया था। अब पूरा विद्यालय बेघर है। अब बच्चों की दिनचर्या मौसम तय करता है। तेज धूप में बरगद की छांव में कक्षा लगती है जबकि बारिश में पढ़ाई रोकनी पड़ती है। किताब-कॉपी बच्चों के पास है लेकिन छत नहीं है। बच्चों को खुले आसमान के नीचे मिड-डे मील परोसा जाता है।ग्रामीणों में इस स्थिति को लेकर नाराजगी है। उनका कहना है कि दो साल में नई इमारत की नींव तक नहीं रखी गई। धूप और बारिश में खुले में बच्चों का बैठना सुरक्षित नहीं है।
रसोइया का घर बना मिनी स्कूल
रसोइया सरवती देवी ने नए भवन बनने तक अपना एक कमरा निशुल्क दिया है। उसी कमरे में विद्यालय के जरूरी कागजात रखे जाते हैं। सरवती देवी ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए यह व्यवस्था की है। विभाग की ओर से इसके लिए कोई सहयोग नहीं मिला है। यह मानवीय पहल है लेकिन पूरी कक्षा संचालित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
नए भवन की नींव तक नहीं गई
गंगवा डेरा निवासी अशोक निषाद का कहना है कि पुरानी इमारत हटे करीब दो साल हो चुके हैं। इतने समय में बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थायी व्यवस्था हो जानी चाहिए थी लेकिन नई इमारत की नींव तक नहीं रखी गई। विभाग क्या कर रहा है, कुछ पता ही नहीं चल रहा। अध्यापकों के पास बारिश में छुट्टी करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता है।
बच्चों की सुरक्षा का भी सवाल
गंगवा डेरा निवासी संजय निषाद, रंजीत, रामभरोसे, जगदीश, बबलू, लालाराम, शकुंतला, सरोज, उमा, रमाकांती का कहना है कि बच्चों को धूप और बारिश में बैठकर पढ़ाना किसी मजबूरी से कम नहीं है। दो साल हो चुके है लेकिन अभी तक विद्यालय नहीं बन पाया है। स्कूल भवन के नाम पर इस गांव के लिए यही बरगद का पेड़ है। बच्चों का पेड़ के नीचे पढ़ना सुरक्षित नहीं है।
शासन को भवन निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण शुरू कराया जाएगा। जिले में 967 विद्यालय हैं। इनमें 200 स्मार्ट कक्षाओं से सुसज्जित हो चुके हैं। अन्य विद्यालयों को बेहतर किया जा रहा है। - मुकेश खरवार, बीएसए, हमीरपुर
फोटो 23 एचएएमपी 02- पेड़ के नीचे पढ़ते गंगवा डेरा के बच्चे। संवाद