बिवांर कांड में धूमिल होती छवि बचाने को प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की
सिफारिश कर दी। इस घोषणा के बाद से जहां विभिन्न राजनैतिक दल व फर्जी फंसाए
गए लोग खुश हैं वहीं दंगाइयों और ड्यूटी में तैनात पुलिस कर्मियों के
चेहरों की रंगत उड़ने लगीं हैं।
25 जुलाई को बिवांर कस्बे में छात्रा
स्वीकृति ने छेड़खानी से आहत होकर आत्मदाह कर लिया था। तब आक्रोशित
ग्रामीणों ने कस्बे में थाने के सामने तिराहे पर जाम लगाकर बवाल किया था।
तब पुलिस फायरिंग में युवक रोहित पांडेय की गोली लगने से मौत हो गई थी।
जबकि कल्लू खां, जयकरन सिंह, अमित वर्मा घायल हुए थए। तब शासन ने पुलिस
अधीक्षक व थानाध्यक्ष को सस्पेंड कर दिया गया।
इसके बाद से विभिन्न
राजनैतिक दलों व कस्बे की महिलाओं का धरना सीबीआई जांच की मांग पर
कलेक्ट्रेट में जारी है। तमाम विरोधों के चलते जनता के बीच अपनी धूमिल हो
रही छवि बचाने के लिए शासन ने 18 दिन बाद सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है।
जिससे कस्बावासी दंगाइयों व घटना के समय तैनात पुलिस अधिकारी व कर्मी खासे
चिंतित नजर आ रहे हैं। संबंधित थानाध्यक्ष थाने में 25 जुलाई की जीडी
खुलवाकर उनका अध्ययन करने में जुटे हैं।
उधर, शिवसेना के प्रांतीय नेता
महंत रतन ब्रह्मचारी ने बताया कि बिवांर कांड के 18 दिन बीतने के बाद
सरकार के कान में जूं रेंगी है।
बताया कि शिवसेना ने इस प्रकरण में उच्च
न्यायालय इलाहाबाद में रिट दायर कर सरकार पर दबाव बनाया। कोर्ट के दबाव के
चलते उप्र सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर
केंद्र सरकार को पत्र भेजने का ऐलान कर दिया है।
बिवांर प्रतिनिधि के अनुसार, बिवांर कांड को लेकर अखिलेश सरकार द्वारा केंद्र सरकार से
सीबीआई जांच की सिफारिश करने की खबर आते ही कस्बेवासियों एवं व्यापारियों
ने राहत की सांस ली है।
वहीं इस संबंध में मृतक के परिजनों ने संतोष व्यक्त
किया कि अब दूध का दूध व पानी का पानी हो जाएगा। सीबीआई जांच की सिफारिश
से पाथादेवी मंदिर में बैठी महिलाओं ने भी अपना धरना समाप्त करने की घोषणा
कर दी है। वहीं गुरुवार को एसडीएम मौदहा प्रवीणा अग्रवाल ने बवाल में घायल
कल्लू खां को इलाज के लिए 40 हजार रुपये दिए।