भइया-भाभी नाम की राखी दिखाता हाजी ख्वाज मोहम्मद।
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मौदहा कस्बे में रक्षाबंधन पर राखी बनाने का कारोबार अब अंतिम चरण में है। राखी बनाने में खासकर मुस्लिम वर्ग के लोग मार्च माह से ही जुट जाते हैं। राखी के सबसे बड़े कारोबारी हाजी ख्वाज मोहम्मद है। कस्बे से राखियाें की थोक बिक्री न सिर्फ आसपास बल्कि सीमावर्ती मप्र के कई जनपदों में जाती हैं। सबसे अधिक कीमत की राखी 500 रुपये की भइया-भाभी के नाम की है। इसके अलावा दर्जनों दुकानदार कस्बे की राखियां बनाकर दुकानें सजाएं हैं।
राखी बनाकर अपना परिवार चलाने वालेे 40 परिवार हैं इनकी महिलाएं व बच्चे घरेलू काम निपटाने के बाद राखी बनाने में जुट जाते हैं। एक महिला ने बिना नाम बताए और चेहरा छिपाए कहा कि वह इस काम में कई महीनों से लगे हैं। उन्हें खुशी होती है कि कमाई के साथ-साथ इस पवित्र बंधन राखी को वे लोग बनाती हैं। जो उनके देशवासियों के हाथों में बंधकर रक्षा का काम करती है।
हाथ में पांच सौ रुपये कीमत की भइया-भाभी नाम की राखी हाजी ख्वाज मोहम्मद ने दिखाई। उन्होंने बताया कि इस वक्त सबसे कीमती यह राखी एक थाल में बंद है। जिसमें भइया और भाभी दोनों की राखियों के साथ सिंदूर, चावल, हल्दी, नारियल व मिश्री पैक है। साथ में हमारे पास बेहद कम कीमत की 25 पैसे की भी राखियां उपलब्ध हैं। कहते हैं कि यहां से छतरपुर, लौड़ी, महोबा, राठ, चरखारी, बांदा, कर्बी, अतर्रा, मूसानगर, मऊरानीपुर, टीकमगढ़, झांसी आदि के व्यापारी राखियां लेकर जा रहे हैं।
राखी बनाने वाले कारीगर मोहम्मद नदीम ने बताया कि इस वर्ष पर्व के नजदीक स्वतंत्रता दिवस पर्व पड़ा है इसके चलते वह तिरंगा राखी बना रहा है। राखी के बीच तिरंगा बना है। यह सैनिकों के अलावा आम लोगों के बीच खासी चर्चित है। इसका दाम भी बेहद कम है।