बारिश की जोरदार दस्तक ने किसानों के चेहरों पर मुस्कान तो ला दी है। लेकिन खरीफ में बुआई का काम लटकने से किसान हताश भी हैं। वहीं ढालूदार खेतों में कुछ किसानों ने फसल तैयार की हैं। इससे उन्हें उम्मीद बंधी है कि आने वाले दिनों में कुछ पैदाकर परिवार की गाड़ी खींच लेंगे।
बीते रबी अभियान ने किसानों को मटियामेट कर दिया। इसे लेकर किसान खरीफ अभियान में बरसात होते ही बुआई के लिए आशान्वित रहे। लेकिन चालू माह में आएदिन हो रही बारिश उनके अरमानों पर पानी फेरने के लिए आतुर है। वहीं कृषि विभाग की मानें तो एक लाख 11 हजार 266 हेक्टेयर का लक्ष्य था। जिसमें 97783 हजार हेक्टेयर में फसलें बोई गई हैं।
18,102 हेक्टेयर में उड़द, 40 हजार हेक्टेयर में तिल, 12,865 हेक्टेयर में अरहर, 16,585 हेक्टेयर में ज्वार और 7,190 हेक्टेयर में मूंग की फसल बोई गई हैं। बाजरा और तिल की बुआई 31 जुलाई तक किसान कर सक ते हैं। वहीं ज्वार का समय निकल चुका है। उजनेड़ी गांव निवासी लल्लू सिंह की मेहनत रंग लाती दिख रही है।
चालू माह के प्रथम सप्ताह में मौसम साफ हुआ तो 15 बीघे में तिल की बुआई कर दी। अब उसकी फसल दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। किसान ने कहा कि उसने खेत को बटाई पर लिया है। कहा कि अन्ना मवेशी नाक में दम किए हैं। रात दिन रखवाली करनी पड़ रही है।
खेत के चारों तरफ झांकर लगा चुका है। इसके बावजूद अगल बगल के किसानों से रखवाली साझा करनी पड़ रही है। इफ्को ने नीम क ी पौध लगाने का अभियान छेड़ रखा है। इसके लिए इफ्को इस बार किसानों को एक हजार पौधे मुहैया कराएगा। ताकि नीम का पेड़ तैयार होने से किसानों को लाभ मिल सके।
इफ्को के क्षेत्रीय प्रबंधक आकाश चौबे ने बताया कि सुमेरपुर सहकारी समिति में एक हजार पौधे डंप करा दिए हैं। कहा कि नीम लगाने से किसानों को जहां फसलों को कीट से बचाने में मदद मिलेगी वहीं स्वच्छ हवा भी मिल सकेगी।