हमीरपुर। अपराध स्थल पर साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो इसका जिम्मा अब डायल-112 की पायलट रिस्पांस व्हीकल (पीआरवी) को सौंपा गया है। इसके लिए पीआरवी पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
वारदात के बाद पुलिस के पहुंचने से पहले ही अक्सर घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुट जाती है। जिससे फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट और अन्य अहम वैज्ञानिक साक्ष्य नष्ट हो जाते हैं। इसे रोकने के लिए पीआरवी कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उन्हें अपराध स्थल सुरक्षा किट उपलब्ध कराई गई है। जिससे फॉरेंसिक टीम को साक्ष्य अपने मूल स्वरूप में मिल सके।
पीआरवी जवान घटनास्थल पर पहुंचते ही घेराबंदी करेंगे और स्थानीय थाने की पुलिस के पहुंचने तक भीड़ को नियंत्रित रखेंगे। गाड़ी में अपराध स्थल की घेराबंदी के लिए पीला टेप मौजूद रहेगा। पीआरवी कर्मी मोबाइल से घटनास्थल के फोटो और वीडियो रिकॉर्ड करेंगे। जिससे विवेचना के दौरान डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्य मजबूत होंगे और अपराधियों को सख्त सजा दिलाने में मदद मिलेगी। बता दें कि जिले में डायल-112 के 47 वाहन हैं। इसमें 37 चार पहिया और 11 बाइक शामिल हैं।
अपराध स्थल को सुरक्षित करना केस की सफलता की पहली सीढ़ी है। पीआरवी कर्मियों की सजगता से अब विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों का महत्व बढ़ेगा और अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने में मदद मिलेगी।
राजेश कमल, सीओ सदर- हमीरपुर (पर्यवेक्षण अधिकारी डायल-112)