सरीला (हमीरपुर)। तहसील क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या से किसान परेशान हैं। ममना बिजली घर से जुड़े करीब 40 गांवों में पिछले चार दिनों से बिजली आपूर्ति प्रभावित है। इससे जहां करीब एक लाख की आबादी को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। वहीं किसान खेतों में पलेवा नहीं कर पा रहे हैं।
इन दिनों रबी फसलों की बोआई के लिए खेतों में पलेवा का काम तेजी से चल रहा है। किसानों को खेत तैयार करने के लिए पानी की जरूरत है लेकिन बिजली की अघोषित कटौती और कम वोल्टेज के कारण नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि पिछले चार दिनों से बिजली की आवाजाही बनी हुई है। 24 घंटे में महज चार से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसमें भी लो-वोल्टेज और दो फेज में आपूर्ति होती है।
बिजली संकट का असर गांवों की पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। नलकूपों का संचालन प्रभावित होने से छेड़ीबेनी, धौहल, बंगरा, कटेहरी, राजमऊ, पुरैनी, ममना, जलालपुर, भेड़ी और कुपरा समेत क्षेत्र के करीब 40 गांवों में पेयजल संकट गहरा गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बिजली आपूर्ति नियमित न होने से जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे करीब एक लाख आबादी पेयजल संकट से जूझ रही है।
नलकूप न चलने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित
बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से खेती के साथ गांव की पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित है। नलकूप न चलने से घरों में पानी की समस्या हो रही है। कई दिन बीतने के बाद भी अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। -देवेंद्र यादव, धौहल।
चार दिन से बिजली की समस्या बनी हुई है। 24 घंटे में चार से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। बिजली आने पर लो-वोल्टेज रहता है। इससे नलकूप नहीं चल पा रहे हैं। पलेवा का समय निकल रहा है लेकिन खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। -शिवशंकर, किसान।
ओवरलोडिंग से हो रही समस्या
पलेवा के लिए एक साथ नलकूप चलने से बिजली का लोड बढ़ गया है। ओवरलोडिंग की समस्या को दूर करने के लिए अधिकारियों से बातचीत की जा रही है। क्षमता बढ़ाने के लिए पांच एमवीए का अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। समस्या के समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं। - हरिश्चंद्र वर्मा, एसडीओ विद्युत सरीला।