पत्योरा। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में किसानों की जमीनें जाने से पट्टाधारक किसानों में गुस्सा हैं। किसानों ने पहले जमीन मुहैया कराने व बाद में प्लांट का कार्य शुरू कराने की मांग की है।
गांव में यमुना नदी किनारे 46 गांवों को शुद्ध पानी मुहैया कराने के उद्देश्य से नमामि गंगे मिशन योजना के अंतर्गत करीब 380 करोड़ की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की सारी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं। लेखपाल ने जगह का चिंहांकन भी करा दिया है। जिसमें जेसीबी मशीन लगाकर कार्यदायी संस्था ने साफ सफाई का कार्य शुरू करा दिया है। लेकिन चिन्हित जगह पर गरीब किसानों के पट्टों की नाप की जा चुकी हैं। लेकिन ऊबड़ खाबड़ जगह होने के कारण पट्टाधारक किसान उनको जोतने बोने में असमर्थ रहे हैं। इधर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनने से काबिज किसानों की जमीन प्लांट में जा रही है। दू्सरी जगह जमीन न मिलने से किसानों में आक्रोश है।
गांव निवासी किसान रामसजीवन निषाद ने कहा कि वर्षों पहले पट्टे हुए थे। कहा कि कुछ जमीन तो फावड़े की ताकत से सही की है। लेकिन अभी भी ऐसी ही पड़ी हुई है। पिता की समाधि स्थल भी मौके में बनी है। कहा कि बैंक से इसी जमीन पर एक लाख का केसीसी बनवा रखा है। कहा कि लेखपाल ने उनकी जमीन प्लांट में नाप दी है। कहा कि जमीन उन्हें दे दी जाए। इसके बाद अपना प्लांट बनाए।
किसान रामप्रकाश सोनकर ने कहा कि तीन एकड़ का पट्टा एक दशक पूर्व किया गया था। जिसमें बैंक से 60 हजार रुपये का केसीसी भी बनवा रखा है। कहा कि उनकी पूरी जमीन पर प्लांट बनाया जा रहा है। पहले उनकी जमीन नाप कर दें। तभी यहां निर्माण कार्य होगा। अन्यथा वह कार्य नहीं होने देंगे।
किसान रमेश सोनकर ने कहा कि करीब एक दर्जन किसानों की जमीन प्लांट में जा रही हैं। पहले इसी जमीन पर सभी को पट्टे नापे जा चुके हैं। कहा कि सोमवार को सभी किसान डीएम से मुलाकात करेंगे। अगर जमीन उन्हें नहीं दी जाती तो आमरण अनशन पर बैठेंगे।
लेखपाल घनश्याम कमल ने कहा कि गाटा संख्या 699 करीब 35 हेक्टेयर का नंबर है। जिसमें तीन हेक्टेयर जमीन वाटर प्लांट में जानी है। कहा कि जिन किसानों के पट्टे पड़ रहे हैं। उनको जमीन दूसरी जगह दी जाएगी। किसान परेशान न हों। किसी भी पट्टेधारक किसान की जमीन नहीं जाएगी।