अभी तक पानी को तरस रही मौदहा बांध की नहरों में पानी छोड़ा गया तो वे ओवरफ्लो हो गईं। सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गईं। अकेले मकरांव गांव में 200 बीघे फसल जलमग्न हो चुकी है।
कई सालों से फसलें बर्बाद होने से वैसे ही किसान आर्थिक रूप से टूट चुका है। इस वर्ष अच्छी बारिश होने से किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद बंधी है।
किसी तरीके से महंगे बीज खरीदकर किसानों ने बुआई की है। लेकिन खेतों के पलेवा के लिए मौदहा बांध से छोड़ा गए पानी से पाटनपुर का मकरांव माइनर ओवरफ्लो हो गया। इससे किसानों की मटर, लाही, अलसी व चने की बोई गई फसलें जलमग्न हो गईं हैं। मकरांव गांव निवासी कृषक शिवदास ने बताया कि उसने पांच बीघा खेत में अलसी की फसल कई दिनों पहले बोई थी जो जम आई थी। वह नहर के पानी से डूब गई है।
इसी तरह सज्जन मिश्रा ने बताया कि चार बीघे की लाही डूबी है। इसी तरह रज्जन मिश्रा की लाही की फसल, आनंदीलाल की तीन बीघा मटर की फसल, रामऔतार सिंह की चार बीघा लाही की फसल जलमग्न हो चुकी है। वहीं, बरदानी यादव, लल्लू सिंह, जगमोहन, विद्या देवी आदि आधा सैकड़ा किसानों की फसलें जलमग्न हुई हैं।
माइनर में पानी उसी गति से चालू है। जो खेत अभी बोए नहीं गए। वह भी तालाब बन गए हैं। जिससे इनमें समय से फसल नहीं बोई जा सकेंगी। उन्होंने राजस्व विभाग से मांग की है कि उनकी फसलों की क्षति का आंकलन कराएं और क्षति का मुआवजा दें। ताकि खेतों में गेहूं की बुआई कर सकें।
उधर, मौदहा डैम के सहायक अभियंता फूलचंद्र का कहना है कि किसान ही खेतों में अनाप शनाप पानी लगा रहे हैं। किसान कहते हैं कि खेत लंबे समय से सूखे पड़े हैं, इसलिए पूरी तरह तर कर रहे हैं। उनकी नहरों के फटने से खेतों में पानी नहीं भरा है।