हमीरपुर। 55 दिन के मासूम अयांश की मौत मामले में जिलाधिकारी अशोक कुमार के आदेश का असर सामने आया है। सीएमएस डॉ. आरएस प्रजापति ने 25 सितंबर को दोपहर के वक्त डयूटी पर तैनात डॉक्टर समेत पूरे स्टॉफ को नोटिस भेजा है। इसमें तीन दिवस के अंदर जवाब मांगा गया है। इसके बाद जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई की जाएगी।
महेरा गांव निवासी संदीप ने बताया कि बेटा अयांश 55 दिन का था। 23 सितंबर को दोपहर तीन बजे मुस्करा सीएचसी से गांव की आशा बहू के साथ आई टीम ने टीका लगाया था। टीकाकरण के बाद अयांश को तेज बुखार आ गया। शुक्रवार 25 सितंबर को सुबह मुस्करा सीएचसी ले गए। यहां पर हालत बिगड़ती देख डॉक्टर ने जिला अस्पताल के लिए रेफर किया था। सरकारी एम्बुंलेंस से जिला अस्पताल के इमरजेंसी में पहुंचे। यहां पर तत्काल उपचार शुरू करने के बजाए पर्चा बनवाने में उलझा दिया गया।
पर्चा बनने के बाद बच्चे को बाल रोग विशेषज्ञ के पास भेज दिया। परिजन का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब 30 मिनट निकल गए। इमरजेंसी में बच्चे का इलाज नहीं किया गया। इसी बीच हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई। इस मामले में सीएमएस ने डयूटी पर तैनात डॉ. नवनीत एवं फार्मासिस्ट से लेकर पूरे स्टॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सीएमएस ने बताया कि जवाब आने के बाद जांच के अन्य बिन्दुओं पर काम किया जाएगा। लापरवाही सामने आने पर आवश्यक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
इमरजेंसी में ओपीडी पर्चा पर सवाल
महेरा गांव के राजू ने बताया कि उसके नाती अयांश को समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उसकी मौत न होती। सरकारी एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचना ही अपने आप में इमरजेंसी सेवा में आता है और फिर अयांश को तो सीएचसी सेंटर से रेफर किया गया था। रेफर लेटर पर भी तैनात डॉक्टर ने इलाज नहीं किया। भतीजे संदीप से पर्चा बनवाने की बात कह दी गई। यह लापरवाही और मनमानी नहीं है तो और क्या है। चार घंटे तक पूरा परिवार बिलखता रहा लेकिन किसी डॉक्टर का दिल नहीं पसीजा और न ही मृतक मासूम का पोस्टमार्टम कराया। यह सिस्टम समझ में नहीं आया, न्याय नहीं मिला तो शिकायत को आगे बढ़ाउंगा।