खेड़ाशिलाजीत उपकेंद्र के बाहर रखी मशीनें खा रहीं धूल।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भरपूर बिजली देने की घोषणाएं हो रही हैं लेकिन विभागीय अधिकारी ही इनमें पलीता लगा रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल है 33 केवीए विद्युत उपकेंद्र खेड़ा शिलाजीत का। यहां बिजली सुधार को आई लाखों की मशीनें बेकार पड़ी हैं।
विद्युत उपकेंद्र खेड़ा शिलाजीत करीब 30 साल पुराना है। इसका भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने से पुरानी मशीन लोड नहीं ले रही है। फीडरों की लाइन में बड़ा फाल्ट आने के बाद भी मशीनें ट्रिप नहीं करती हैं। इस समस्या के निदान के लिए किसानों की मांग पर विभाग ने तीन माह पूर्व एक इनकमिंग और तीन आउट गोइंग मशीनें उपकेंद्र भेजी थीं। लेकिन ये उपकेंद्र परिसर के बाहर खड़ी धूल खा रही हैं। गांव निवासी पूर्व ब्लाक प्रमुख राम सहोदर राजपूत ने बताया कि सूखा होने के बावजूद अधिकारी लापरवाह बने हैं। इनकी उदासीनता के कारण मशीनें बंद पड़ी हैं। उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं।
हादसों का भी डर
गांव के लोगों ने बताया कि फाल्ट होने के बाद भी ट्रिपिंग न होने से हादसों का डर बना रहता है। 27 अप्रैल को टूटे एचटी तार के करंट से गुरु प्रसाद निवासी बौखर की मौत हो गई थी। इसके बाद भी विभाग उदासीन बना बैठा है।
उपकेंद्र में आई मशीनें ठेकेदार की उदासीनता के कारण नहीं लग पा रही हैं। संबंधित ठेकेदार को जल्द मशीन लगाने को कहा है। मशीनों को शीघ्र चालू कराकर बिजली व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
एसपी मिश्रा, अवर अभियंता