हमीरपुर। रोडवेज यात्रियों को कड़कड़ाती सर्दी में फिर से ठिठुरना पडे़गा। शासन से मिली नौ बसों को चित्रकूट डिपो के लिए भेज दिया गया है। स्थानीय डिपो को 61 बसों से ही काम चलाना पड़ेगा।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत पांच माह पहले भव्य ताम झाम के साथ चित्रकूट मंडल के हमीरपुर, महोबा, बांदा को नौ बसें माननीयों ने सौंपी थीं। अगस्त माह में जब नई बसें मिली तो हमीरपुर से दिल्ली जाने के लिए सहूलियत मिली थी। इनका लोड फैक्टर हमेशा अच्छा रहा है। यात्रियों को भी पुरानी की बजाय नई बसों से सफर करने मौका मिला जिससे राहत महसूस की। अब उच्च अधिकारियों की यह दरियादिली मुसाफिरों को भारी पड़ रही है। जिसको लेकर जनपद वासियों में आक्रोश व्याप्त है। वहीं सदर विधायक डॉ. मनोज प्रजापति का कहना है कि इसकी उन्हें जानकारी नहीं हैं। अधिकारियों से बात की जाएगी कि जिले और नई बसें दी जाएं। शासन में भी यह बात प्रमु्खता से रखी जाएगी।
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मंडल के इन जिलों से इतनी बसें भेजी गईं
डिपो - भेजी गईं नई बसें
बांदा डिपो- 03
हमीरपुर डिपो- 02
राठ डिपो- 02
महोबा डिपो- 02 नई, एक पुरानी
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- शहर निवासी ब्रह्म स्वरूप शर्मा ने बताया कि अमृत महोत्सव तहत मिली बसों को दूसरे डिपो में भेजना जनता के साथ यह धोखा है। नई बसें छीननी ही थी तो दिया ही क्यों था।
- बृजेश बादल का कहना है कि हमीरपुर डिपो में ज्यादातर बसें खटारा हो गईं हैं। अगर नई बसें भी चलीं जाएंगी तो और दिक्कत होगी। जबकि पुरानी बसों को हटाकर नई बसें दी जानी चाहिए।
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बोले जिलाध्यक्ष ये
-भाजपा जिलाध्यक्ष बृजकिशोर गुप्ता का कहना है कि बसें भेजें जाने की उन्हें जानकारी नहीं हैं। इस संबंध में वह उच्च अधिकारियों से बात करेंगे कि नई बसों को जिले में ही लगाया जाए। जिससे आम जन को दिक्कत न हो।
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हमारा नहीं उच्च अधिकारियों को फैसला
-हमीरपुर डिपो के एआरएम अकील अहमद खान, राठ डिपो के एआरएम राजेश सिंह और महोबा डिपो के एआरएम हेमंत मिश्रा ने बताया कि नई बसों को चित्रकूट भेजने का फैसला उच्चाधिकारियों का है। जो दिशा-निर्देश दिए गए हैं उसका पालन किया गया है।