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केंद्र सरकार की ग्राम ज्योति योजना का हाल बदतर

Fri, 07 Oct 2016 11:55 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/हमीरपुर
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छानी गांव में निर्माणाधीन पावर सबस्टेशन। - फोटो : अमर उजाला
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पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना का जिले में बुरा हाल है। योजना के तहत सात पावर सब स्टेशनों का निर्माण होेना है।साथ ही 197 गांवों का विद्युतीकरण कि या जाना है। शासन स्तर से स्वीकृति मिलने के बाद सब स्टेशनों के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। लेकिन करीब छह माह गुजरने को है, सिर्फ बेरी गांव में सब स्टेशन स्थापित करने के लिए जमीन मिल सकी है। केंद्र से संचालित पं. दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को बीते वर्ष जुलाई में शुरू किया गया था। योजना के तहत नलकूपों के लिए अलग से फीडर बनाए जाने थे।
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बीपीएल परिवारों को कनेक्शन, 100 कम आबादी के भी गांवों को बिजली से रोशन करने के साथ जर्जर लाइन और ट्रांसफार्मरों को बदला जाना है। लेकिन जिले में बिजली घरों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है। योजना से जिले में सात पावर सबस्टेशनों के निर्माण कराने की पहल शुरू है। इनमें कुरारा ब्लाक के बेरी व कुसमरा, ब्लाक मौदहा ब्लाक के परेहटा, सुमेरपुर ब्लाक के बिदोखर, मुस्करा ब्लाक के इमिलिया, गोहांड के अमूंद, सरीला ब्लाक के झबरा में स्टेशनों को हरी झंडी मिल गई है। इससे पावर कारपोरेशन जिलाधिकारी के जरिए ग्राम समाज की जमीन मांग रहा है। लेकिन सिर्फ बेरी गांव में पहले से स्टेशन के लिए आवंटित जमीन तो आसानी से मिल गई, वहीं अन्य स्थानों में नदेहरा में ही जमीन मिलने की संभावना है। वहीं कुसमरा गांव में जमीन न मिलने से कारपोरेशन ने बगल के झलोखर गांव में जमीन की तलाश तेज कर दी है।

गांव में 33/11 केवीए पावर सबस्टेशन निर्माणाधीन है। एक माह के अंदर निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। लेकिन एक साथ दोे ग्राम पंचायतों के साथ बाजार होने के बावजूद सब स्टेशन में अलग से टाउन फीडर न बनाए जाने से ग्रामीणों में निराशा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या को देखते हुए उन लोगों ने चंदा कर जमीन खरीदकर पावर कारपोरेशन को दी है। इसके बाद भी उनके गांव को अलग से फीडर न देना अन्याय है।
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पावर कारपोरेशन इन दिनों गांव में पांच करोड़ की लागत से सबस्टेशन का निर्माण करा रहा है। बीते वर्ष गांव में स्टेशन बनाए जाने की स्वीकृति मिली। लेकिन ग्राम समाज क ी जमीन का अभाव होने से इस स्वासा गांव में बनाने की तैयारी कारपोरेशन करने लगा। लेकिन जैसे ही गांव के लोगों को इनकी भनक लगी तो सभी ने मिलकर सबस्टेशन के लिए जमीन खरीदने का संकल्प ले लिया। ग्रामीणों ने आपस में चंदा किया और गांव के चौकीदार की डेढ़ बीघा जमीन पावर स्टेशन के नाम बीते 19 अक्तूबर 20015 को बैनामा करवा दिया।


मौजूदा समय में स्टेशन का निर्माण सिल्वर लाइन इलेक्ट्रिकल पुणे करा रहा है। इधर पावर स्टेशन का काम करा रहे प्राइवेट कं पनी के इंजीनियर अमित पांडेय ने बताया कि स्टेशन में तीन फीडर स्थापित किए जा रहे हैं। जिनमें मोराकांदर, बजेहटा मवईजार व अतरार के नाम से फीडर बन रहे हैं। इन्हीं फीडरों में किसी एक से छानी गांव को जोड़ा जाएगा। इसको लेकर लोग बेहद निराश हैं। कहते हैं कि छानी के लोगों ने खुद अपना धन खर्च कर जमीन खरीदकर दी। लेकिन बिजली अगर वही पुराने ढर्रे पर मिली तो फिलहाल हालात वही रहेंगे। कार्यदायी संस्था के इंजीनियर अमित पांडेय ने बताया कि जेई आलम गिरि अंसारी ने गांव को अलग फीडर देने से मना कर दिया है। जिले के सात स्थानों पर सबस्टेशनों के निर्माण के लिए जमीन की तलाश की जा रही है। अभी सिर्फ बेरी गांव में ही जमीन मिल सकी है। जिलाधिकारी को ग्राम समाज की जमीन के लिए पत्र भेजा है। साथ ही विभाग के अभियंता भी अपने स्तर से जमीन की तलाश कर रहे हैं।
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