माहे रमजान के फैजान के क्या कहने हैं इसकी तो हर घड़ी रहमत भरी है। इस महीने में अज्र ओ सवाब बहुत ही बढ़ जाता है। नफिल का सवाब फर्ज के बराबर और फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है। जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज शेफउल्ला ने बताया कि एक हदीस में आया है कि माहे रमजान में एक बार दरूद पढ़ें तो लाख दरुद पढ़ने का सवाब मिलता है। इसी तरह रमजानुल मुबारक में एक बार सुब्हान अल्लाह कहे तो उसका सवाब गैर रजमान में एक लाख बार कहने पर मिलता है।
एक रिवायत के मुताबिक अर्श उठाने वाले फरिश्ते रोजदारों की दुआ पर आमीन करते हैं। वहीं दरिया की मछलियां इफ्तार तक दुआ ए मगफिरत करती रहती हैं। माहे मुबारक के कुल चार नाम हैं। पहला माहे रमजान, दूसरा माहे सब्र, तीसरा माहे मुआसात और चौथा माहे उसवते रिस्क। मजीद फरमाते हैं कि रोजा सब्र है, जिसकी जजा रब है और वह इसी महीने रखा जाता है। इसलिए इसे माहे सब्र कहते हैं। मुआसात का मतलब भलाई करना है। इस महीने में रोजदार व मुस्लिम भलाई के काम ज्यादा करते हैं।
इसलिए इसे माहे मुआसात कहते हैं। इस माह में रिस्क की फराखी होती है। गरीब भी निमते खा लेते हैं। इसलिए इसका नाम माहे उसवते रिस्क भी है। कहा कि माहे रमजान गुनाहों को पाक करता है और नेक लोग के दर्जे बढ़ाता है। माहे रजमान शुरू होते ही दोजख के दरवाजे बंद हो जाते हैं और जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इसलिए माहे रमजान में नेकियों की ज्यादती ज्यादा हो जाती है और गुनाहों में कमी आती है।
रमजान का आगाज होते ही चहल-पहल बढ़ गई है। मस्जिदों में नमाजियों के लिए सारे इंतजाम किए गए हैं। वजू के लिए भी व्यवस्था की गई है। इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से शाबान की 29 तारीख को ही चांद की तस्दीक की गई है। इसके बाद से ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। देर रात तक तरावीह पढ़ने के बाद लोगों ने सहरी की तैयारी की। सहरी के लिए देर रात तक दुकानें भी खुली रहीं। अब एक महीने तक मुस्लिम बहुल इलाकों में देर रात तक चहल पहल रहेगी।
सोमवार को चांद दिखने के साथ ही माहे मुबारक रमजान की शुरुआत हो गई। रमजान के लिए मुस्लिम बहुल बस्तियों में साफ सफाई के साथ चहल पहल बढ़ गई है। सहरी व इफ्तार के लिए लोगों ने सामान खरीदना शुरू कर दिया है। बाजारों में सिवईं, टोस्ट, ब्रेड, मक्खन की दुकानें सज गई हैं। मस्जिदों को झालरों से सजाया गया है। साथ ही तरावीह के वक्त के लिए मस्जिदों में कूलर व एसी भी लगाए गए हैं। कस्बे में आधा दर्जन मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की जाएगी।