मनरेगा में पत्नी गोमती के सिर पर मिट्टी भराई तसला रखता मनुलाल
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सरीला (हमीरपुर)। कानपुर जैसे महानगर में अपनी हुनर का डंका बजाने वाला 35 वर्षीय ढोलक वादक लाकडाउन मार के चलते पैतृक गांव आकर मनरेगा में फावड़ा भांज रहा है। अब उसने अपने क्षेत्र में ही रहकर हुनर की दम पर कमाई का मन बना लिया है। क्षेत्र के गुटकवारा गांव निवासी 35 वर्षीय मन्नूलाल अच्छा ढोलक वादक है। क्षेत्र में उसके हुनर की कद्र न होने पर वह सात साल पहले कानपुर चला गया था। कानपुर में नौबस्ता मोहल्ले में पत्नी गोमती व तीन बच्चों के साथ किराए के मकान पर रहता था। मनुलाल ने बताया कि वह ढोलक का अच्छा वादक होने से कानपुर में उसकी एक पहचान है। धार्मिक व सामाजिक आयोजनों में उसे बुलाया जाता है। महीने भर में वह पंद्रह से बीस हजार रुपये कमा लेता था। वहां उसका परिवार खुशहाली से रह रहा था। कोरोना के लाकडाउन में उसके परिवार के सामने खाने के लाले पड़ गए थे। इस पर 2 मई को बाइक से परिवार सहित अपने गांव आ गया। लगातार 14 दिन घर में क्वारंटीन रहा। मनुलाल ने बताया कि घर में पैसों की तंगी पर उसने 18 मई को रोजगार सेवक नंदकिशोर से मनरेगा में काम करने की इच्छा जताई। इस पर उन्होंने अगले दिन से गांव में चल रहे जलरोक बांध के कार्य में लगा दिया। बताया कि उसने अपने गांव से कभी रिश्ता नहीं तोड़ा है। जब मन किया घर आकर उसकी मरम्मत कराता रहा है। बताया कि इस बीच उसने राशन कार्ड और जाबकार्ड भी बनवा लिया था। अब मनरेगा में चल रहे कार्य में पत्नी गोमती के साथ मजदूरी कर रहा है। कहा कि अगर गांव में ही काम मिलता रहेगा तो कभी बाहर नहीं जाएगा। कहा कि एक छोटे से कमरे में वह तीन बच्चों व पत्नी के साथ रहता है। उसके चार भाई अपने अपने परिवारों के साथ अलग रहते हैं। भूमिहीन होने के बाद भी अभी तक सरकारी योजनाओं का उसे लाभ नहीं मिला है।