गहरौलीखुर्द में शहीद का ताबूत लेकर घर की ओर जाते सेना के जवान।
- फोटो : amarujala
सिलीगुड़ी में शहीद हुए जवान नरेश कुमार पाल का पार्थिव शरीर सेना के विशेष वाहन से सुबह नौ बजे गहरौली खुर्द गांव लाया गया। शहीद का शव पहुंचते ही मां, पत्नी शशिप्रभा, बच्चों व परिजनों की चीख से माहौल गमगीन हो गया। शहीद के घर के बाहर उमड़े जनसमूह ने हाथों में तिरंगा झंडा लेकर नरेश अमर रहे, वंदेमातरम व भारत माता की जय के नारे लगाए। प्रदेश स्तरीय मंत्री या वरिष्ठ अधिकारियों के न आने पर शहीद के भाई ने डीएम से फोन पर नाराजगी जताई।
जिसके बाद करीब 10 बजे डीएम गहरौली पहुंचे। डीएम ने शहीद के परिवार को 20 लाख रुपये की आर्थिक मदद मुख्यमंत्री द्वारा दिए जाने की जानकारी दी। वहीं, गांव पहुंचे एमएलसी ने 51 हजार व बसपा प्रत्याशी ने 50 हजार रुपये शहीद के भाई को दिए। जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ने गांव में शहीद स्मारक, ब्लाक प्रमुख सूरजबली यादव ने सरकारी आवास देने की घोषणा की। इसके बाद झांसी से आए सेना के जवानों ने अंतिम सलामी दी।
अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों तथा नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित की। शहीद के छोटे भाई राकेश ने बेटे उत्कर्ष को गोद में लेकर मुखाग्नि दिलाई। डीएम व एसपी ने संयुक्त रूप से बताया कि 16 अक्तूबर को चीन वार्डर पर सिलीगुड़ी में युद्धाभ्यास क र लौटते वाहन दुर्घटना में नरेश कुमार पाल शहीद हुए हैं। इससे आगे अधिकारियों ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।
शहीद जवान नरेश कुमार पाल के अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पार्थिव शरीर को दर्शनों के लिए रखा गया तो श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया। भीड़ अधिक होने पर नियंत्रित करने में पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी। अधिकारियों ने महिलाओं व पुरुषों की अलग-अलग लाइन लगवाकर अंतिम दर्शन कराए। शहीद के मकान पर झांसी से आए सेना के जवानों ने सलामी देते हुए ताबूत उठाया। डीएम उदयवीर सिंह व एसपी अनिल कुमार सिंह ने इसकी अगुवाई की।
कुछ दूर बाद परिजनों को भी कंधा देने का मौका मिला और एक लंबा काफिला इस अंतिम यात्रा में धीरे-धीरे चलता हुआ आगे बढ़ा। अंत्येष्टि स्थल पर एक तख्त पर ताबूत को रखा गया। जहां क्रमवार सशस्त्र सलामी दी गई। हवा में गोलियां दाग साथी को जवानों ने अंतिम विदाई दी। असम से आए कर्नल एम सिंह ने किसी भी प्रकार की जानकारी देने से इंकार कर दिया।