करीब चार वर्ष पूर्व हुए दुष्कर्म सेे आहत किशोरी के आत्महत्या कर लेने के मामले में मंगलवार को अदालत ने एक आरोपी को दोषी ठहराया। अपर सत्र न्यायालय कोर्ट एक के न्यायाधीश सैय्यद वाइजमियां ने आरोपी को आजीवन कारावास व 23 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
न्यायालय के शासकीय अधिवक्ता देवसिंह यादव ने बताया कि मौदहा कोतवाली क्षेत्र के गांव निवासी एक व्यक्ति अपनी पत्नी व साले के साथ 27/28 अप्रैल 2013 की रात करीब तीन बजे भूसा डाल रहा था। उसकी 16 वर्षीय पुत्री घर में अकेले थी। गांव निवासी कल्लू उर्फ बंदरा पुत्र रामरतन काछी घर पहुंचा और पेट दर्द की दवा मांगने को कहकर दरवाजा खुलवाया।
किशोरी ने दरवाजा खोल दिया जहां अभियुक्त ने किशोरी के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उसके साथ दुराचार किया। इसी बीच किशोरी के माता-पिता आ गए। शोर मचाने पर गांव के अन्य लोग आ गए।
आरोपी को पकड़ बाहर लेकर निकले। उसी समय घटना से आहत किशोरी ने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उसी समय मौका पाकर युवक भाग निकला। पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ घर में घुसकर दुष्कर्म करने व आत्महत्या करने को प्रेरित करने का मुकदमा दर्ज किया था। मंगलवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने आरोपी को आजीवन कारावास व 23 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।