जुलाई 2013 में युवती की जलाकर हत्या करने के मामले में कोर्ट ने पति को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई। मामले की सुनवाई न्यायाधीश शैलोज चंद्रा की अदालत में हुई।
अपर सत्र न्यायालय कोर्ट चार के सहायक शासकीय अधिवक्ता आनंद कुमार सक्सेना ने बताया कि छतरपुर मप्र के थाना प्रकाश बरहोरी के गुडहरा निवासी मंगल सिंह ने अपनी पुत्री अर्चना की शादी चार मई 2007 को सुमेरपुर थानाक्षेत्र के पचखुरा गांव निवासी राकेश सिंह पुत्र श्रीपाल सिंह के साथ की थी। जिसके बाद दो संतानें हुईं।
शादी के बाद से ससुराजीजन दहेज की मांग को लेकर अर्चना का उत्पीड़न कर मारपीट करने लगे। ससुरालीजनों ने छह जुलाई 2013 की रात अर्चना के हाथ पैर बांधकर घर के अंदर जला दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। शव के नाम पर मात्र कंकाल ही बचा था। सुमेरपुर पुलिस ने पति राकेश व उसके भाई राजेश के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया था। अधिवक्ता ने बताया कि अदालत में मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी व वादी पक्ष के बीच आपसी सुलह हो जाने से वादी पक्ष ने आरोपी पक्ष के विरुद्ध साक्ष्य नहीं दिए।
मगर दस्तावेजी साक्ष्य व परिस्थितियां आरोपी पक्ष के विरुद्ध थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के पेट में अधपचा भोजन मिला, जो साबित करता है कि मृतका ने अपनी मृत्यु से दो से चार घंटे पूर्व भोजन किया था। इससे यह सिद्ध होता है कि वह आत्महत्या नहीं कर सकती है। गौरतलब हो कि आरोपी पक्ष ने आत्महत्या किए जाने का आरोप लगाया था। सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश शैलौज चंद्रा ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद आरोपी पति को आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, साक्ष्य अभाव में दूसरे आरोपी को दोषमुक्त किया गया।