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बुंदेलखंड में हवेली परियोजना से जुड़े किसानों की बदली तकदीर

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भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। बनारस कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक ने टीम के साथ सौखर में संचालित हवेली परियोजना से जुड़े किसानों फसलें देख जानकारी ली। इसे बुंदेलखंड के सभी गांवों में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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केंद्र व प्रदेश सरकार ने 20 करोड़ का इंतजाम कर हवेली परियोजना को लागू की थी। इस परियोजना में बुंदेलखंड के सभी सातों जिलों को शामिल किया गया है। इसमें उन गांवों को चयनित किया है जिनकी पहचान बीहड़ी एवं कम उपजाऊ क्षेत्र के रूप में है। पूरे बुंदेलखंड में 35 हजार हेक्टेयर जमीन को इसमें शामिल कर मेड़बंदी, चेकडैम, नाला सफाई, खेत तालाब आदि से जल संचय का कार्य कराया गया है।
वैज्ञानिक तकनीक से किसानों के मध्य बागवानी, सब्जी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। ताकि किसान रबी के साथ खरीफ फसलों प्याज एवं मूंगफली के उत्पादन कर सके। परियोजना से क्षेत्र के बीहड़ी गांव सौंखर, नजरपुर, कारीमाटी चयनित किए गए।
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शनिवार को बनारस विश्वविद्यालय के कृषि संकाय के निदेशक डॉ. रमेशचंद्र, प्रो. आरएम सिंह, मृदा विभाग के डॉ. सतीश सिंह, संकाय प्रमुख प्रो. यशवंत सिंह, कृषि अर्थशास्त्री प्रो.ओपी सिंह ने हवेली परियोजना से जुड़े किसानों से मुलाकात कर फसलों का अवलोकन किया। किसानों ने बताया कि उन्नतशील बीज प्राप्त होने तथा वैज्ञानिकों की सलाह पर खेती करने से 20 से 30 फीसदी उत्पादन क्षमता बढ़ी है। इससे टीम संतुष्ट नजर आई। भ्रमण के दौरान समर्थ फाउंडेशन के देवेंद्र गांधी, किसान सभाजीत कुशवाहा, रंजीत कुशवाहा, रामविलास कुशवाहा, दसीराम, महादेव, रामसेवक, शिवनारायण आदि मौजूद रहे।
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