अक्तूबर 2015 में मौरंग खनन के पट्टे निरस्त होने और रोक के बावजूद अवैध खनन होता रहा। इसकी तस्दीक आरटीआई के तहत एआरटीओ कार्यायल से मांगे गए आंकड़े भी करते हैं। पाबंदी के बावजूद पांच महीनों में ही 801 ओवरलोड मौरंग के ट्रकों का चालान हुआ। इस दौरान रोज हजारों ट्रकों से अवैध मौरंग की ढुलाई की बात टोल प्लाजा के आंकड़े भी स्वीकारते हैं। याचिकाकर्ता ने ये सबूत सीबीआई को सौंप दिए हैं।
16 अक्तूबर 2015 को उच्च न्यायालय ने जिले में संचालित 60 मौरंग खनन के पट्टों को निरस्त किया था। जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई सूचना पर एआरटीओ ने जनवरी से मई 2016 तक पकड़े गए ट्रकों का विवरण दिया। बताया है कि 390 ट्रक एआरटीओ तो 411 ओवरलोड ट्रकों को पुलिस ने बंद किया था। यानी कुल 801 मौरंग लदे ओवरलोड ट्रकों का चालान हुआ। इसमें एआरटीओ ने 78 लाख रुपये का राजस्व भी वसूला। वहीं, थानों में पकड़े गए ट्रक अदालत से छूटे।
इसकी जानकारी जनहित याचिकाकर्ता विजय द्विवेदी एडवोकेट ने सीबीआई को दी है। यह भी कहा है कि प्रतिदिन हजारों मौरंग भरे ट्रकों की अवैध निकासी हुई। इस चोरी में करोड़ों के वारे न्यारे किए गए। अवैध खनन का असर सीधे बिक्रीकर विभाग पर पड़ा। इस अवधि में विभाग को खनिज से व्यापार कर नहीं मिल सका और मौरंग माफिया मालामाल होते रहे। जनहित याचिकाकर्ता ने हमीरपुर-सागर मार्ग पर कानपुर की ओर जाने वाले टोल प्लाजा से गुजरने वाले मौरंग भर ट्रकों की प्रतिदिन संख्या करीब ढाई हजार बताई है। साथ ही, झांसी-कानपुर हाईवे के आटा में बने टोल प्लाजा और जोल्हूपुर से होकर गुजरने वाले मौरंग भरे ट्रकों की संख्या 3700 बताई है।
411 ट्रक पुलिस ने पकड़े
पुलिस ने ओवरलोड मौरंग भरे 411 ट्रकों का चालान किया है। इसमें थाना सुमेरपुर पुलिस ने 72, स्थानीय कोतवाली पुलिस ने 216, कुरारा पुलिस ने 51, सिसोलर ने 40, ललपुरा पुलिस ने 31 व बिवांर पुलिस ने एक ओवरलोड ट्रक को पकड़ा है। सीज ट्रकों को उनके मालिकों ने अदालत के जरिए छुड़वाया।