पाटनपुर गांव में बाग में तैयार ड्रैगन फ्रूट फल को देखता किसान ऋषि शुक्ला। संवाद
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हमीरपुर। बुंदेलखंड की सूखी धरती पर दो किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की है। एक बार बुआई कर 20 से 25 वर्ष तक उपज ली जा सकती है। इस बार बारिश अधिक होने से उपज कमजोर हुई है।
पाटनपुर गांव के प्रगतिशील किसान ऋषि शुक्ला ने बताया कि कौशांबी के किसान रविंद्र कुमार पांडेय से प्रेरित होकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। वर्ष 2019 में 100 पौधे लगाए। तापमान अधिक होने से काफी पौधे नष्ट हो गए थे। इसके बाद दोबारा पौधे लगाए। अब उनके खेत में 300 प्लांट तैयार हैं।
इसमें 100 पौधे फल देने लगे हैं। पिछले वर्ष करीब 50 फल हुए थे। फल 400 रुपये किलो में मौदहा के व्यापारियों को बेचे थे। गोहानी गांव के राजेंद्र सिंह ने भी 25 पौधे लगाकर खेती शुरू की है।
जिला उद्यान अधिकारी डॉ. रमेश पाठक ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट इम्युनिटी बढ़ाने, खून बढ़ाने और कैंसर रोक की रोकथाम में कारगर है।
ऐसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती
कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत ने बताया कि खेत में छह-छह फीट की दूरी में सीमेंट पोल बनवाएं। एक कतार से दूसरी कतार की दूरी 8 से 10 फीट होनी चाहिए। पोल के चारों तरफ डेढ़ से दो किलो गोबर खाद डालकर चारों कोनों में चार पौधे लगाएं। रोपाई फरवरी से अक्तूबर तक की जा सकती है। एक एकड़ में डेढ़ से दो लाख तक का खर्च आता है। प्रति वर्ष छह से आठ टन तक उपज होती है। इससे करीब 10 लाख तक की आमदनी की जा सकती है।