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हमीरपुर: कोरोना से चार शिक्षकों की हुई मौत, चुनाव के दौरान हुई मौतों को प्रदेश सरकार ने झुठलाया

Thu, 20 May 2021 08:24 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

पंचायत चुनाव में शिक्षक कर्मियों की मौत के दावे को सरकार गलत व निराधार बता रही है। सिफ तीन शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी के दौरान मौत की बात कहे जाने से शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। 
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कोरोना से मौत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव व मतदान के दौरान कोरोना से हुई मौत पर शिक्षकों को मुआवजा देने की घोषणा की। इस पर प्रदेश में 1621 मौतों के दावे प्रस्तुत किए गए। इनमें जनपद के चार शिक्षक शामिल हैं। उधर शिक्षक कर्मियों की मौत के दावे को सरकार गलत व निराधार बता रही है। सिफ तीन शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी के दौरान मौत की बात कहे जाने से शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। 
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ग्राम पंचायत चुनाव में सबसे अधिक शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। जिसमें प्रधानाध्यापक, अध्यापक, शिक्षामित्र, अनुदेशक समेत अन्य चतुर्थ श्रेेणी कर्मचारी शामिल थे। कोरोना संक्रमण के चलते प्रदेश भर में तमाम शिक्षक कोरोना से असमय काल के गाल में समां गए। पंचायत चुनाव के दौरान संक्रमित कर्मचारियों की मौत को लेकर शिक्षक संगठनों ने प्रदेश सरकार से मुआवजे की मांग की।

 
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जिस पर प्रदेश सरकार ने चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मौत होने पर 50 लाख की सहायता धनराशि देने की घोषणा की है। शिक्षक संघों की ओर से पंचायत चुनाव में कोरोना संक्रमित से 1621 कर्मियों की मौत के दावे प्रस्तुत किए थे। जिसमें जनपद के प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी जनपद में चार शिक्षकों की चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमित होने से मौत होने की सूचना प्रांतीय अध्यक्ष को भेजी है।

जिसमें राठ ब्लाक के कन्या प्राथमिक विद्यालय गिरवर के प्रधानाध्यापक कृष्ण कुमार कौशल, सुमेरपुर ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मोराकांदर के प्रधानाध्यापक रणविजय सिंह, मौदहा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय सायर के प्रधानाध्यापक शमीम अहमद, गोहांड ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय मगरौठ के प्रधानाध्यापक रतनलाल सिंह शामिल हैं।

शिक्षक संघ के जिलामंत्री देवेंद्र सिंह चंदेल ने बताया प्रदेश सरकार मुआवजा न देने को लेकर तरह-तरह के नियम कानून लागू कर रही है। अगर मृतक शिक्षकों को मुआवजे की धनराशि नहीं मिलती है तो प्रांतीय आह्वान पर आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। उधर बीएसए सतीष कुमार का कहना है कि उन्होंने इन शिक्षकों के परिजनों से मौत के कारणों के अभिलेख मांगे तो अभी तक सिर्फ दो की ही सूचना मिली है जिसमें भी अभिलेख अधूरे हैं।
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