हमीरपुर। शासन की ओर से पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए तमाम प्रयास हर वर्ष किए जाते हैं। समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम के भी चलाए जाते हैं। जिससे जनमानस को इसके प्रति जागरूक किया जा सके। हर साल पर्यावरण दिवस पर हरियाली रोपी जाती है। फिर भी धरती की गोद खाली रह जाती है।
पर्यावरण को सबसे अधिक खतरा सिंगल यूज प्लास्टिक से है। प्लास्टिक पर प्रतिबंध के सरकारी प्रयास दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। वहीं जल संरक्षण के श्रोतों को जीवंत रखना भी जनमानस की एक बड़ी जिम्मेदारी है। शासन प्रशासन हर वर्ष ग्राम पंचायतों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराता है। संरक्षण में लापरवाही बरतने के चलते वह पेड़ बनने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। जिले का कुल क्षेत्रफल 415948 हेक्टेयर में फैला है। जो यमुना व बेतवा नदियों के बीच में बसा है। जिसमें सिर्फ 23520 हेक्टेयर में ही वन क्षेत्र है। जो कुल क्षेत्रफल का 5.6 फीसदी है। जिसमें 7.4 फीसदी गैर कृषि क्षेत्र व 78.1 फीसदी कृषि क्षेत्र है। वहीं 539 तालाब व 22605 कुएं हैं। पिछले तीन वर्षों में 1.20 करोड़ पौधे शासन प्रशासन द्वारा रोपित कराए गए। करोड़ों रुपये खर्च हुए लेकिन दस फीसदी पौधे ही पेड़ बन पाए। वन विभाग के मुताबिक जिले में वर्ष 19-20 में 19 लाख, वर्ष 20-21 में साढ़े 14 लाख, वर्ष 21-22 में 17 लाख 12 हजार, वर्ष 22-23 में 68 लाख व चालू वर्ष मेें 72 लाख पौधे रोपित किए जाने का लक्ष्य शासन ने दिया है।
वृक्ष मित्र संगठन के संरक्षक शहर निवासी अधिवक्ता राजेंद्र वीर सिंह चौहान को जनपदवासी ग्रीनमैन के नाम से जानते हैं। कहते हैं कि पर्यावरण है तो हम हैं। पौधे ही प्राण है। शहर के यमुना पथवे में कड़ी मेहनत करके हजारों पौधों को पेड़ बनाया है। लोगों को उनकी छांव के नीचे बैठा देखकर बड़ी शांति मिलती है।
समाजसेवी जलीस खान कहते हैं कि जलवायु परिवर्तन पूरे विश्व के भविष्य के लिए खतरा है। कहा असमय वर्षा होना, भीषण गर्मी, वन क्षेत्र कम होना, जीव-जंतुओं का विलुप्त होना आदि कारण है। पर्यावरण के लिए जल, जमीन, जंगल, जीव जन्तुओं को बचाया जाना बहुत आवश्यक है। इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है।
कुंडौरा गांव निवासी 66 वर्षीय इलेक्ट्रिशियन संतोष कुशवाहा सुमेरपुर कस्बे को हरा भरा करने के लिए पूरा जीवन खपा दिया। वर्ष 1995 से पौधे लगाने की शुरुआत करने वाले संतोष कुशवाहा आज ग्रीन मैन के नाम से जाने जाते हैं। जो कस्बे के स्टेशन परिसर, तपोभूमि, रोटीराम वाटिका, मोक्षधाम सहित पूरे कस्बे में करीब तीन हजार पौधे रोपित कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। 2015 में इनके नेतृत्व में बनी पर्यावरण संरक्षण समिति पूरी तन्मयता के साथ इस कार्य में जुटी है। संतोष कुशवाहा का कहना है कि जिस तरह से पौधे लगाने के बाद बढ़ते और फलते फूलते हैं। उसी तरह उस पौधे को लगाने वाले व्यक्ति का भी विकास होता है।
शासन से इस वर्ष 72 लाख पौधे रोपित कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 36 लाख पौधे विभिन्न विभागों की ओर से रोपित किए जाएंगे। 18 लाख पौधे बीज की बोआई कराकर व शेष वन क्षेत्र आदि की जमीनों पर रोपित किए जाएंगे। जल, पृथ्वी व जंगल को प्रदूषण से बचाने के लिए जनमानस को आगे आना होगा। तभी इसे संरक्षित किया जा सकता है। प्लास्टिक भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
भरुआसुमेरपुर में प्रतिवर्ष पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए पेड़ों को बचाने व उनको संरक्षित करने की शपथ ली जाती है। लेकिन जैसे ही यह तिथि गुजरती है। सभी इस शपथ को भूल जाते हैं। यही कारण है कि सभी के नाक के नीचे लकड़ी माफिया दिन-रात नियम कानून को धता बताकर मशीनें चलाकर पेड़ों को ध्वस्त कर रहे हैं। जिन्हें पर्यावरण संतुलन से कुछ लेना देना नहीं है। जलाऊ लकड़ी की आड़ में चोरी छिपे प्रतिबंधित लकड़ी का कारोबार धड़ल्ले के फल फूल रहा है। शीशम, आम, नीम, महुआ, पीपल भी काटकर खपाया जा रहा है। वन क्षेत्राधिकारी विशन सिंह यादव ने बताया कि जलाऊ लकड़ी में कोई प्रतिबंध नहीं है। फिर भी शिकायत मिलने पर कार्यवाही की जाती है। (संवाद)