हमीरपुर। कंक्रीट के बसे शहरों की खिड़कियों और घर आंगन में परिंदों की चहचहाहट कम ही सुनाई देती है। वहीं, पर्यावरण जागरुकता को लेकर कुछ लोगों ने बीड़ा उठा रखा है। उनके घर आंगन में चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई देती है जिसे सुन मन प्रफुल्लित हो उठता है।
मौदहा विकास खंड के ग्राम टिकरी बुजुर्ग निवासी राजकुमार सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय टिकरी में अनुदेशक (शिक्षक) हैं। कुंभ 2019 में स्वच्छाग्रही बनकर गए राजकुमार को प्रधानमंत्री सम्मानित कर चुके हैं। उन्होंने युवाओं, किसानों, बुजुर्गों व समाजसेवियों को जोड़कर पक्षियों के घोसला और दानी पानी का इंतजाम करने के लिए बुंदेलखंड सृजन परिवार बनाया है। वह बताते हैं कि अभियान में पत्नी के साथ मिलकर अपने गांव से शुरू किया था जो आज कई गांवों तक पहुंच गया है। राजकुमार बताते हैं कि हमने स्कूलों में जाकर बच्चों को भी इस अभियान से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान में मुख्य रूप से देवप्रकाश, देवप्रसाद शुक्ला, सभाजीत पाल, मदन पाल, मनीष शुक्ला, अनिल द्विवेदी, उत्तम सिंह, राज कुमार सिंह, हेतराम यादव, रामतीर्थ सिंह, रमेश निषाद, नरेंद्र सैनी, श्वेता सिंह, नेहा सहित सैकड़ों सृजन परिवार के कार्यकर्ताओं का सतत सहयोग प्राप्त हो रहा है। वहीं मौदहा निवासी शिक्षिका भी पक्षियों के दाना पानी को लेकर लोगों को जागरूक कर रहीं हैं।
राजकुमार बताते हैं कि अतिप्राचीन गढ़ेश्वर महादेव मंदिर टिकरी बुजुर्ग में कई वर्षों से चिड़ियों के लिए दाना पानी, घोसलों की व्यवस्था करते चले आ रहे हैं। जो कि उन्हें अपने पूर्वजों से सीखने को मिला था। एक दिन उनकी पत्नी श्वेता सिंह ने उन्हें सोशल मीडिया पर एक पोस्ट दिखाई जिसमें पक्षियों के महत्व के बारे में लिखा था। पढ़कर उन्हें अच्छा लगा और पत्नी के सुझाव एवं मित्रों के सहयोग से उन लोगों ने कार्य को वृहद रूप से करने की योजना बनाई।
साल 2022 में अपने बुंदेलखंड सृजन परिवार के साथ मिलकर मौदहा की कई बस्तियों मंगीपुरवा,सिचौली पुरवा, मराठी पुरा, अरतरा चौराहा,बड़ी देवी मंदिर सहित 23 ग्राम पंचायतों पक्षियों के लिए घोंसलों और दाना-पानी की व्यवस्था गांव के लोगों ने सुनिश्चित की है। इस वर्ष 50 ग्राम पंचायतों तक इस अभियान को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।