हमीरपुर। गरीबों को काम देने के नाम पर ग्राम प्रधानों ने अब वीबीजीरामजी में कमाई का खेल शुरू कर दिया है। नियम विरुद्ध एक ही परिवार में पति-पत्नी के जॉबकार्ड बनवाकर खाते में फर्जी भुगतान किया जा रहा है। बसवारी ग्राम पंचायत में करीब 25-30 परिवारों में पति-पत्नी के जॉबकार्ड बनवाए गए हैं। ऐसे में योजना पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इससे पहले राठ के बरेल गांव में मुर्दों से काम कराने का मामला सामने आया था।
मुस्करा ब्लाॅक की ग्राम पंचायत बसवारी में प्रधान और रोजगार सेवक विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी (वीबीजीरामजी) योजना में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। योजना में नियमानुसार एक परिवार में एक ही जॉबकार्ड बन सकता है। इसी पर पति-पत्नी और उनके अविवाहित बच्चे भी काम कर सकते हैं लेकिन गांव में योजना में फर्जीवाड़ा करने के लिए पूरी योजना बनाकर काम किया गया। ग्राम पंचायत में नियम विरुद्ध करीब 25-30 परिवारों में पति-पत्नी दोनों के अलग-अलग जॉबकार्ड बनवाए गए हैं। दोनों के जॉबकार्ड से डिमांड जनरेट कर उनके नाम मस्टर रोल भी भरे गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में जीरामजी योजना में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार यदि अलग-अलग जॉबकार्ड नियमों के तहत बनाए गए हैं तो संबंधित अभिलेखों और पात्रता की जांच कर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। जॉबकार्डों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। जॉबकार्ड पर दर्ज कार्य दिवस और भुगतान की भी जांच कराई जाए। नियमों की अनदेखी कर जॉबकार्ड जारी किए गए हैं तो जिम्मेदारों की भूमिका की जांच कर कार्रवाई हो।
बरेल में हुए फर्जीवाड़े की जांच ठंडे बस्ते में
राठ ब्लॉक के बरेल गांव में दिसंबर 2025 में योजना के तहत मृत व्यक्तियों के नाम पर काम दर्ज होने का मामला सामने आया था। शिकायत के बाद जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच शुरू की थी। हालांकि बाद में जांच के नाम पर लीपापोती कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। आज तक मामले में कार्रवाई नहीं हुई है।
पति-पत्नी के नाम अलग-अलग जाॅबकार्ड
1- भगवानदास पुत्र दयाराम- जॉबकार्ड संख्या 1449-2024।
शकुंतला पत्नी भगवानदास- जॉबकार्ड संख्या 1449 ए-2024।
2- रामसहोदर पुत्र राजकुमार - जॉबकार्ड संख्या 1452-2024।
प्रेमलता पत्नी रामसहोदर - जॉबकार्ड संख्या 1452 ए-2024।
3- राममूर्ति पत्नी बलवीर- जॉबकार्ड संख्या 1453-2024।
बलवीर पुत्र जयसिंह- जॉबकार्ड संख्या 1453 ए-2024।
4- जयसिंह पुत्र पहचान- जॉबकार्ड संख्या 1455-2024।
सावित्री पत्नी जयसिंह- जॉबकार्ड संख्या 1455 ए-2024।
5- चंद्रशेखर पुत्र कुंवरलाल- जॉबकार्ड संख्या 1021 ए-2007।
रेखारानी पत्नी चंद्रशेखर - जॉब कार्ड संख्या 1021 बी - 2007।
6- निर्दोष सिंह पुत्र करनसिंह- जॉबकार्ड संख्या 1024 ए-2024।
आरती रानी पत्नी निर्दोष सिंह - जॉबकार्ड संख्या 1024 बी-2024।
7- धीरेंद्र पुत्र रामपाल- जॉबकार्ड संख्या 1038-2021।
ममता पत्नी धीरेंद्र- जॉबकार्ड संख्या 1038 ए-2024।
8- मदन सिंह पुत्र कुंजन- जॉबकार्ड संख्या 1042 ए-2024।
किरण पत्नी मदन सिंह- जॉबकार्ड संख्या 1042 बी- 2024।
9- वीर सिंह पुत्र अयोध्या- जॉबकार्ड संख्या 1134 ए- 2006।
विनीता पत्नी वीर सिंह- जॉबकार्ड संख्या 1134 बी- 2006।
10- हरगोविंद पुत्र शंकरलाल- जॉबकार्ड संख्या 1428-2006।
ममता पत्नी हरगोविंद- जॉबकार्ड संख्या 1428 ए- 2006।
ये हैं नियम
-एक परिवार का एक जॉबकार्ड: पति-पत्नी और परिवार के अन्य वयस्क सदस्य एक ही जॉबकार्ड में शामिल होते हैं।
-अलग जॉबकार्ड अवैध: एक ही परिवार या पति-पत्नी के लिए अलग-अलग जॉबकार्ड बनवाना नियमों के विरुद्ध है।
-दो अलग-अलग जॉबकार्ड बने पाए जाते हैं तो डुप्लिकेसी (दोहरापन) मानकर एक को समाप्त कर दिया जाता है।
काम का अधिकार: जॉबकार्ड के माध्यम से परिवार के सभी वयस्क सदस्य काम की मांग कर सकता हैं।
ग्राम पंचायत निवासी भगवानदास वर्मा का जॉबकार्ड बनाया गया था। साथ ही उनकी पत्नी शकुंतला का भी जॉब कार्ड बना दिया गया जबकि वर्ष 2021-22 में दोनों का एक ही कार्ड बना था। बताया कि बीते सात-आठ माह से उन्हें काम नहीं मिला है।
ग्राम पंचायत निवासी सीताराम का जॉबकार्ड बना था। इसके बाद भी उनकी पत्नी रोशनी का जॉब कार्ड बना दिया गया। बताया कि सितंबर आधा निकल चुका है कि लेकिन अभी तक इन्हें कोई कार्य नहीं मिला है। जॉबकार्ड प्रधान के लोग अपने पास रखते हैं।
पति-पत्नी के अलग-अलग कई जाॅबकार्ड बने हैं। हालांकि इस विषय में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है। जाॅबकार्ड वह अपने पास रखकर क्या करेंगे। जॉबकार्ड धारक ही अपने पास कार्ड रखते हैं। -रविंद्र राजपूत, ग्राम प्रधान बसवारी।
एक परिवार में एक ही कार्ड बनता हैं। अगर किसी दंपती के बेटे की शादी हो जाती है तो उसका कार्ड अलग बनता है। एक कार्ड में केवल 100 दिन ही काम मिल पाता है। प्रधानों के पास जॉबकार्ड होने की जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। -राजीव सिंह, बीडीओ मुस्करा।
एक परिवार में एक ही जॉबकार्ड बनेगा। कभी-कभी जारी तो हो जाता है लेकिन सर्वर से डिलीट कर दिया जाता है। आवास के लाभार्थियों में ये समस्या ज्यादा आती है। अब नई योजना के तहत नए जॉबकार्ड बनाए जा रहे हैं। इससे यह समस्या भी दूर हो जाएगी। -राघवेंद्र सिंह, मनरेगा उपायुक्त।
फोटो 15 एचएएमपी 01- भगवान दास वर्मा।
फोटो 15 एचएएमपी 01- भगवान दास वर्मा।
फोटो 15 एचएएमपी 01- भगवान दास वर्मा।