हमीरपुर। करीब चार वर्ष पुराने किशोर के अपहरण और हत्या के बहुचर्चित मामले में एससीएसटी एक्ट के विशेष न्यायाधीश रणवीर सिंह ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 60-60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही पीड़ित पक्ष को क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है।
राठ कोतवाली क्षेत्र के सिकंदरपुरा इलाका निवासी जगमोहन ने बताया था कि नाती सर्वेश (17) का 16 अगस्त 2022 को अपहरण कर लिया गया था। आरोपियों ने परिजन से तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। इसके बाद किशोर की हत्या कर शव को शंकरशाला मंदिर के पास फेंक दिया था। 18 अगस्त को शव मिलने की सूचना पर परिजन ने शिनाख्त की थी। परिजनों ने मझगवां थाना क्षेत्र के कुल्हैड़ा निवासी आलोक, गोहानी निवासी भानसिंह उर्फ किल्टा, गोहानी निवासी प्रवेंद्र और चिकासी थाना क्षेत्र के बंगरा गांव निवासी जितेंद्र पर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने चारों के खिलाफ अपहरण, हत्या समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की थी। विवेचना के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किए गए।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता विजय सिंह ने साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने आलोक, जितेंद्र कुमार, भान सिंह उर्फ किल्टा और प्रवेंद्र को दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने चारों दोषियों को धारा 302/34, धारा 364-ए और धारा 3(2)5एससीएसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास तथा 60-60 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। न्यायालय ने पीड़ित पक्ष को 75 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने के भी निर्देश दिए हैं। फैसले के बाद दोषियों को जिला कारागार भेज दिया गया।