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कोहरे से दलहन को फायदा, सरसों को नुकसान

Sat, 03 Dec 2016 11:46 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला हमीरपुर
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कोहरे के बीच लहलहाती सरसों की फसल। - फोटो : Amar ujala
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तीन दिनों से पड़ रहा कोहरा कुछ फसलों के लिए अच्छा तो कुछ के लिए मुसीबत बना है। दलहन बोने वाले किसानों के चेहरों पर चमक आ गई है। जबकि सरसों की अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाए किसान परेशान हैं। सरसों के फूल में रोग लगने की संभावना बढ़ गई है।
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जिले की 70 फीसदी क्षेत्र असिंचित है। बीते वर्ष सूखा पड़ने से किसानों के खेत परती पड़े रहे। इस बार अच्छा मानसूनी होने पर किसानों ने बिना देरी किए अक्तूबर के दूसरे पखवारे में ही दलहनी फसलों की बुआई कर दी। इस बार चना 75,076 हेक्टेयर क्षेत्र में बोया गया है। मटर 19,124 हेक्टेयर, मसूर 28,669 हेक्टेयर व सरसों 19,194 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बोईं गई है।

जबकि 19,133 हेक्टेयर में अन्य फसलें बोई गई हैं। गेहूं का लक्ष्य 1,03,072 हेक्टेयर तय है। अभी तमाम किसान पलेवा करने में व्यस्त हैं। असिंचित क्षेत्रों में बोई गईं दलहन की फसलें तेज धूप के कारण मुरझा रही थीं। लेकिन 30 नवंबर से पड़ रहे कोहरे ने इन फसलों में जान डाल दी है। सरसई गांव निवासी प्रगतिशील किसान गिरीश पालीवाल और संतराम कुशवाहा ने कहा कि  कोहरे से तापमान गिरा है।
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इससे फसलों को नई जान मिली है। फसलें देखकर मन भी प्रफुल्लित होने लगा है। कहते हैं कि पिछले साल तो सूखे ने उन लोगों की फसलों को चौपट कर दिया था। तीन दिनों से पड़ रहे कोहरे से मटर की पौध पांच इंच तक बढ़ गई है। सिंचाई के साधन न होने पर जिन खेतों में मटर, चना व मसूर की फसलें खड़ी हैं, वे तापमान अधिक होने से सूख रहीं थीं। लेकिन अब इन फसलों में रौनक आ गई है।

जिला कृषि अधिकारी डा. सरस कुमार तिवारी ने कहा कि कोहरे से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा होगा। इस फसल के किल्ले ज्यादा निकलेंगे। अगर सरसों की फसल में फूल निकल आया है, तो नुकसान होने की संभावना है। कीट रोग लगने पर दलहनी फसलों में सल्फरयुक्त दवा का छिड़काव करना चाहिए।
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