राहत राशि के 52 लाख रुपये डकारने वाले चार लेखपालों की करतूत पांच किसानों को दी गईं 19 चेकों ने सामने ला दी। ये चेक दूसरी तहसील व पड़ोसी जनपद के लोगों को जारी की गईं थीं। सभी चेक 18 हजार रुपये धनराशि की थीं। इन्हीं चेक को आधार बनाकर हरिचरन फौजी ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी तो अफसरों में खलबली मच गई।
स्टेट बैंक बसेला का ग्राहक सेवा केंद्र चलाने वाले हरचरन फौजी के काउंटर पर कैश होने आई पांच लोगों की 19 चेक ही इस घोटाले का सूत्रधार थीं। यह वह चेक हैं, जिन्हें तहसील सरीला के लेखपालों ने मनमाने ढंग से तहसील राठ व महोबा जनपद में रहने वालों को जारी की थीं। यह सभी चेक 18 हजार रुपये धनराशि की थीं। भूपेंद्र खरे निवासी खड़ाकर व सुरेश निवासी अतरौलिया राठ को दो-दो चेक, इंद्रपाल निवासी नौरंगा राठ, धर्मेंद्र निवासी कैथा व विदेश पत्नी परमेश्वरी दयाल निवासी अतरौलिया राठ को एक-एक चेक, रमेंद्र सिंह धगवां को दो, बृषभान निवासी विजयपुर जनपद, महोबा व श्यामसुंदर बंडवा को तीन-तीन, नजर मोहम्मद निवासी राठ को चार चेक दी गईं थीं।
तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि इस घोटाले के मामले में लेखपालों के अलावा उन लोगों के विरुद्ध भी कार्रवाई होगी जिन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया और जिन्हें फर्जी तरीके से चेक मिलीं हैं। उनके द्वारा लेखपालों पर दर्ज कराए गए मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं। जिन्होंने चेक के माध्यम से भुगतान कराया है।
चेकों के माध्यम से हुईं गड़बड़ी
राहत राशि की वितरण की धांधली में अब तक खास बात यह खुलकर सामने आई है कि सारे भुगतान चेकों के माध्यम से हुए हैं। तहसीलदार मनोज कुमार ने बताया कि अभी तक ई-पेंमेट से हुए भुगतान का एक भी मामला सामने नहीं आया है। यह सारी जानकारी बैंकाें से एकत्र की गई है।
बैंकों की साठगांठ से ही संभव
कृषि अनुदान की राहत राशि में हुए घोटाले में बैंकाें की संलिप्तता भी साफ दिखाई दे रही है। आरोप लगाते हुए इस घोटाले को उजागर करने में महती भूमिका निभाने वाले समाजसेवी हरचरन फौजी ने कहा कि क्षेत्र की बैंकाें में दलालों के जमघट लगते हैं। बिना बैंकों की साठगांठ के यह संभव नहीं है। पुलिस जांच में यह सब कुछ खुलकर सामने आ जाएगा।
बड़े किसानों को नहीं दिया अनुदान
क्षेत्र के दो गांवों में बड़े काश्तकारों को बीते वर्ष 2015-16 में सूखा राहत रशि की चेक अब तक नहीं मिली हैं। गहरौली व हुसैना में छोटे काश्तकारों को ही चेक मिलीं। मगर इन दोनों ही गांवों के बड़े काश्तकारों को एक पैसे की राहत राशि नहीं मिली है। किसानों ने राहत राशि पाने के लिए लेखपाल से लेकर डीएम तक के चक्कर लगाए। लेकिन उनको अभी तक कोई लाभ नहीं मिला। किसान आनंद कुमार गुरुदेव, महिपाल यादव, सत्यप्रकाश राजपूत, भैयालाल गुरुदेव, मनोज द्विवेदी आदि ने आशंका जाहिर की है कि सरीला तहसील की तरह उनकी चेकाें को भी फर्जी तरीके से भुगतान करा लिया गया है। किसानों ने शीघ्र चेकों का भुगतान कराए जाने की मांग की है।
बीते 2015-16 में हुई गड़बड़ी की शिकायत पर जांच में चार लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। तहसीलदार स्तर से जांच हो रही है। जांच में और भी लेखपाल आ सकते हैं। सरकारी धन का दुरुप्रयोग करने वालों को किसी भी हालत में बक्सा नहीं जाएगा।
- उदयवीर सिंह यादव, जिलाधिकारी