हमीरपुर। करीब 16 साल पुराने अनुसूचित जाति के युवक के उत्पीड़न और पीटने के मामले में मंगलवार को एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने फैसला सुनाया है। उन्होंने दोषी पिता व दो पुत्रों को छह-छह साल की सजा सुनाई और 13-13 हजार का जुर्माना लगाया है।
मुस्करा थाना क्षेत्र के दामूपुरवा गांव निवासी सुखलाल पुत्र छंगा ने न्यायालय में धारा 156(3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि 24 अगस्त 2010 की रात उसका पुत्र मइयादीन और भाई राजाराम खेत से लौट रहे थे। नहर पुल के पास पहले से घात लगाए बैठे गांव निवासी बालादीन और उनके दो बेटे लखन और देवेंद्र ने चेहरे पर टार्च जलाई।
मना किया तो तीनों लोग पीटने लगे। विरोध करने पर जातिसूचक गालियां देते हुए जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान भाई राजाराम दौड़कर घर पहुंचा और सूचना दी। मइयादीन गंभीर रूप से घायल हो गया था और उसकी पसली टूट गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल को मुस्करा स्थानीय अस्पताल पहुंचाया।
गंभीर रूप से घायल मइयादीन को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मामले में पुलिस की ओर से कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने अदालत की शरण ली थी। अदालत के आदेश पर मुस्करा थाने में दो मार्च 2011 में बालादीन और उनके दो बेटे लखन और देवेंद्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए।
एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष न्यायाधीश रनवीर सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुना। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर बालादीन और उनके दोनों बेटों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। न्यायाधीश ने तीनों दोषियों को धारा 325/34 के तहत छह-छह वर्ष के सश्रम कारावास और छह-छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं धारा 323/34 में एक-एक वर्ष, धारा 504 व 506 में दो-दो वर्ष तथा एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(10) में चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने दोषियों पर कुल 30 हजार रुपये क्षतिपूर्ति लगा पीड़ित पक्ष को देने के आदेश दिए हैं।