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Hamirpur News: तीन माह से नहीं बन रहे ई-वाउचर, गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड ठप

Wed, 29 Oct 2025 12:21 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
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हमीरपुर। शहर स्थिति जिला अस्पताल सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर करीब तीन माह से गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड ठप हैं। इसके लिए ई-वाउचर जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। इससे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवतियों की जांच नहीं हो पा रही हैं। मजबूरी में गर्भवतियां निजी केंद्रों में 500 रुपये देकर जांच करा रही हैं।
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एनएचएम से बजट जारी न होने के कारण यह संकट खड़ा हुआ है। अनुमान के मुताबिक, अब तक करीब डेढ़ हजार गर्भवती महिलाओं की जांचे नहीं हाे सकी हैं।

प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना का हाल बदहाल है। योजना के तहत जिले भर के 10 सरकारी सेंटरों की जांचों के लिए 15 प्राईवेट पैथोलॉजी में निशुल्क जांच कराए जाने की सुविधा दी गई थी। स्पर्श प्रणाली में सुधार न होने से गर्भवतियों को निजी लैबों पर पैसा खर्च कर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। अगस्त माह से साॅफ्टवेयर अपडेट के चलते किसी को ई-वाउचर नहीं मिल पा रहा है। इसका खामियाजा प्रति माह करीब 400-500 गर्भवतियों को भुगतना पड़ रहा है।

ऐसे मिलती सुविधा

प्रधानमंत्री मातृत्व योजना में गर्भवतियों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य विभाग से संबद्ध अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर निशुल्क जांच कराई जाती हैं। इसके लिए जिला अस्पताल सहित नौ सीएचसी के लिए 425 रुपये का एक ई-वाउचर जनरेट किया जाता है। ई-वाउचर मिलने के बाद एक क्यूआर कोड आता है। इसको स्कैन करने पर निजी केंद्र के खाते में पैसा चला जाता हैं।
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नहीं मिल रहा लाभ, पैसे करने पड़ रहे खर्च

जिला महिला अस्पताल में जांच कराने आई कुरारा क्षेत्र के हरौलीपुर गांव निवासी सीता ने बताया कि उसे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए जिला अस्पताल से कोई वाउचर नहीं दिया गया है। बाहर से 500 रुपये देकर जांच कराई है।



नहीं मिला वाउचर, 500 रुपये देकर कराई जांच

सुमेरपुर क्षेत्र के टेढ़ा गांव की रहने वाली पूर्ति कहती हैं कि उनकी पहली डिलेवरी है। चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए कहा तो वह निजी पैथोलॉजी से 500 रुपये देकर जांच कराई है। कोई ई-वाउचर नहीं दिया गया।
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तीन माह से ठप जांचें

आशा जानकी ने बताया कि बीते तीन माह से निशुल्क अल्ट्रासाउंड की जांचें ठप हैं। पोर्टल में कुछ समस्या बताई जा रही है। इसके चलते गर्भवतियों की पैसे खर्च करके जांचे करानी पड़ रही हैं।

इस योजना में पारदर्शिता बरतने के लिए स्पर्श प्रणाली से भुगतान प्रक्रिया को जोड़ा जा रहा है। ऐसे में दो माह से भुगतान के लिए ई-वाउचर ही जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। जल्द ही समस्या का निराकरण होगा। यह पूरे प्रदेश की समस्या है।
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- डॉ. गीतम सिंह, सीएमओ।
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