हमीरपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान पीठ ने हमीरपुर जिले में रेत खनन के लिए 14 जून 2024 को जारी ई-निविदा को अवैध घोषित करते हुए निरस्त कर दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट कहा कि बिना वैध जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर) के खनन स्थलों की नीलामी नहीं की जा सकती।
यह आदेश अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव व विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मूल आवेदन संख्या 1215/2024 पर सुनवाई के बाद पारित किया। यदराम सिंह की ओर से दायर आवेदन को स्वीकार करते हुए अधिकरण ने पूरी निविदा प्रक्रिया को कानून के विरुद्ध माना।
अधिकरण ने पाया कि हमीरपुर जिले की पूर्व डीएसआर वर्ष 2022 में समाप्त हो चुकी थी। वहीं, मई 2024 में तैयार ड्राफ्ट डीएसआर को 14 जून 2024 तक राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण उत्तर प्रदेश से स्वीकृति नहीं मिली थी। इसके बावजूद निविदा जारी कर दी गई, जो नियमों के विपरीत है।
पीठ ने वर्ष 2020 के रेत खनन संबंधी प्रवर्तन एवं निगरानी दिशा-निर्देशों तथा बिहार राज्य बनाम पवन कुमार मामला के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वैध डीएसआर के अभाव में खनन की अनुमति या नीलामी पूरी तरह अवैध है।
राज्य सरकार के इस तर्क को भी अधिकरण ने खारिज कर दिया कि बाद में डीएसआर की स्वीकृति से प्रक्रिया वैध हो गई। अधिकरण ने इसे गंभीर अवैधता करार देते हुए कहा कि यह न्यायालय के आदेशों की अवहेलना के समान है। अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आशय पत्र (एलओआई) जारी होने से सफल बोलीदाताओं के पक्ष में कोई अधिकार उत्पन्न नहीं होता, खासकर जब खनन कार्य शुरू ही नहीं हुआ हो।
मामला वर्ष 2024 से संबंधित है और एनजीटी में विचाराधीन था। उन्होंने कहा कि अधिकरण के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।
-विकास परमार, जिला खनन अधिकारी