हमीरपुर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की मुख्य पीठ ने हमीरपुर जिले में रेत खनन से जुड़ी जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट (डीएसआर)-2024 की दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा है कि रेत खनन की मंजूरी से पहले जरूरी रिप्लेनिशमेंट स्टडी (खनिज के दोबारा जमा होने की प्रक्रिया का अध्ययन) का पूरा परीक्षण नहीं किया गया था। आदेश देने वाली मुख्य पीठ में अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद शामिल हैं। मुख्य पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (एसईआईएए) और राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (एसईएसी) नए सिरे से रिपोर्ट की समीक्षा करे।
याचिकाकर्ताओं ने हमीरपुर की डीएसआर-2024 और उससे जुड़ी रेत खनन टेंडर प्रक्रिया की वैधता को चुनौती दी थी। उनका आरोप था कि रिपोर्ट को खनिज के दोबारा जमा होने की प्रक्रिया के अध्ययन पर उचित विचार किए बिना और सतत रेत खनन प्रबंधन दिशानिर्देश, 2016 और रेत खनन के लिए प्रवर्तन और निगरानी दिशानिर्देश, 2020 का पूरी तरह पालन किए बिना मंजूरी दी गई थी।
सुनवाई में एनजीटी ने पाया कि डीएसआर को 25 अक्तूबर 2024 को मंजूरी मिल गई थी, जबकि खनिज के दोबारा जमा होने की प्रक्रिया के अध्ययन की रिपोर्ट 11 मार्च 2025 को अधिकारियों के पास पहुंची। एनजीटी ने कहा कि किसी भी डीएसआर के लिए यह अध्ययन बेहद जरूरी होता है। इसी से तय होता है कि नदी से कितनी मात्रा में सुरक्षित तरीके से रेत या खनिज निकाला जा सकता है। डीएसआर को मंजूरी देते समय अधिकारियों के पास अध्ययन की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं थी। हमीरपुर डीएसआर को रद्द करने से इन्कार करते हुए एनजीटी ने एसईएसी और एसईआईएए को निर्देश दिया कि वे खनिज के दोबारा जमा होने की प्रक्रिया का अध्ययन की जांच करने के बाद डीएसआर का नए सिरे से मूल्यांकन करें और पर्यावरण से जुड़े सभी जरूरी सुरक्षा उपायों का पालन सुनिश्चित करें।
चार अन्य बिंदुओं पर भी जांच का आदेश
एनजीटी ने अधिकारियों को यह जांचने का भी निर्देश दिया है कि क्या नदियों के पानी के डूब क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई है? क्या खनिज निकालने की मात्रा उपलब्ध / दोबारा जमा हुए खनिज की मात्रा के 60% तक ही सीमित है? क्या खनन के लिए प्रवर्तन और निगरानी दिशानिर्देश, 2020 के संबंधित प्रावधानों का पालन किया गया है? क्या बारिश के डेटा से जुड़ी समस्याओं सहित तकनीकी खामियों की ठीक से जांच की गई है? ट्रिब्यूनल ने आगे कहा कि टेंडर मंगाने वाले विवादित नोटिस और उसके बाद होने वाली किसी भी खनन गतिविधि की वैधता दोबारा मूल्यांकन की प्रक्रिया के नतीजे पर निर्भर करेगी।