फोटो 19 एचएएमपी 17- कपसा गांव के पास नहर की फटी सीसी लाइनिंग। संवाद
मौदहा (हमीरपुर)। कपसा गांव के पास से निकली नहर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। करोड़े रुपये खर्च होने के बाद भी तीन साल के अंदर नहर में दरारें व अंडरपास की दीवार ढह गई है। दीवार गिरने से जलभराव होने से पांच माह से आवागमन ठप है।
केंद्र सरकार ने सूखे बुंदेलखंड के किसानों के खेतों को हरा भरा करने के लिए जनपद महोबा में 2,500 करोड़ की लागत से अर्जुन सहायक सिंचाई परियोजना की शुरूआत 16 साल पहले की थी। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ने इस आधी अधूरी परियोजना का लोकार्पण भी कर दिया था। लेकिन, लोकार्पण के चार साल बीतने के बाद भी इस नहर से अभी तक जिले के किसानों को पानी नसीब नहीं हुआ है।
कपसा गांव निवासी कृपाली साहू ने बताया कि बीते जनवरी-फरवरी माह में गांव के पास 800 मीटर नहर में सीसी लाइनिंग का कार्य कराया गया था। निर्माण के चार माह बाद ही नहर की सीसी लाइनिंग कई जगह से फट गई है। तत्कालीन जेई कुलदीप ने मरम्मत के नाम पर लीपापोती कर काम पूरा दिखा दिया।
गांव निवासी कामता यादव कहते हैं कि 10 जुलाई को अंडरपास के ऊपर पड़ी सीसी दरारों की लीपापोती की और 12 जुलाई की सुबह गांव के पास नहर पर बने अंडरपास की विंगवाॅल भरभरा कर ढह गई। पूरी परियोजना भृष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। गनीमत रही की अंडरपास में अधिक पानी भरा होने के कारण राहगीर नहीं निकल रहे थे, नहीं तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी। साथ ही दूसरी तरफ की विंगवॉल भी तिरछी हो गई है, जो कभी भी गिर सकती है।
फोटो 19 एचएएमपी 17- कपसा गांव के पास नहर की फटी सीसी लाइनिंग। संवाद