बिवांर थानाक्षेत्र के कुनहेटा गांव में बैंक व साहूकारों के कर्ज से डूबे
एक छोटे कृषक ने मौसम व जंगली पशुओं से तबाह फसल देखकर देर रात अपने ही खेत
में खड़े बबूल के पेड़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
गांव निवासी
इंद्रजीत द्विवेदी (47) पुत्र लक्ष्मीनारायन छह-सात बीघे का भूमि का मालिक
है। उसने कुछ वर्ष पूर्व यूपी इलाहाबाद ग्रामीण बैंक कुनहेटा से ग्रीनकार्ड
बनवाकर कर्ज लिया था। कर्ज बढ़कर तकरीबन दो लाख हो गया।
बैंक वालों के
तगादेेे बाद भी वह बैंक का कर्ज अदा नहीं कर पा रहा था। इसके अलावा कुछ
साहूकारों का भी उस पर कर्ज था। उसने अपने बड़े बेटे सौरभ की शादी बीते
वर्ष की थी। उसमें मेें भी उसका कुछ कर्ज हो गया था।
उसे उम्मीद थी कि इस
साल फसल अच्छी होगी तो वह कर्ज अदा करेगा। लगातार मौसम की मार के चलते न तो
बीते वर्ष फसल अच्छी हुई और न उसके पहले। इस वर्ष उसे आशा थी की अच्छी फसल
होगी। दिसंबर व जनवरी में लगातार मौसम की खराबी से फसलों को नुकसान हुआ।
जो कुछ बचा वह जंगली जानवरों ने चट कर दिया।
इंद्रजीत द्विवेदी शनिवार को
मौसम के खराब होने के बाद भी वह खेतों की रखवाली करने गया। मौसम के खराब
होते देख वह चिंतित हो गया। इस सदमे में उसने खेत में खड़े बबूल के पेड़
में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
रविवार की सुबह जब वह घर नही पहुंचा तो
परिजन व ग्रामीण उसे खोजने निकले तो देखा कि उसका शव पेड़ में फांसी से
लटका है। बेटे सौरभ ने बताया कि घर में न तो कोई तनाव था और न ही कोई ऐसी
बात थी। जिससे पिता इतना बड़ा कदम उठा सके।
उसने बताया कि अलबत्ता वह बैंक व
साहूकारों के कर्ज की चिंता जरूर करते थे। उसने संभावना जताई कि यहीं कारण
हो सकता है। जिससे उसके पिता ने यह कदम उठाया। घटना की सूचना पुलिस को दे
दी गई। राजस्व कर्मियों का कहना है कि उनके संज्ञान में अभी ऐसा मामला नहीं
आया।