शासन ने गेहूं खरीद केंद्र तो खोल दिए हैं लेकिन गेहूं पर तय मानक आड़े आने से खरीद का काम ठप है। जमीन पर पड़ी फसल को समेटकर निकाला गया गेहूं इन केंद्रों में नहीं खरीदा जा रहा है। मायूस किसान औने-पौने दाम पर गल्ला व्यापारियों को गेहूं बेचने को मजबूर हैं।
कृषि उत्पादन मंडी समिति में चार गेहूं खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। खरीद का कार्य बीते चार अप्रैल से शुरू है। तबसे पीसीएफ केंद्र में करीब 200 क्विंटल और 65 क्विंटल क्रय विक्रय खरीद केंद्र में खरीदा गया। इसी के बाद नया आदेश आया। जिसमें कहा गया कि गेहूं की बोरियों की सिलाई मशीन और प्लास्टिक के धागे से होगी।
जबकि केंद्रों में न तो मशीनें हैं और न बिजली। किसी तरह सिलाई मशीनें केंद्र प्रभारियों ने मंगाई और बिजली का प्रबंध किया तो खरीद का मानक आडे़ आ गया। गेहूं का दाना बेहद पतला हो गया है। निर्धारित मानक के अनुसार 6 प्रतिशत पतला दाना होने पर तो गेहूं खरीदा जा सकता है। जबकि 2 प्रतिशत गेहूं में मिला अन्य जिंस खरीदा जा सकेगा।
इसके विपरीत खरीद केंद्र एफसीआई में गेहूं का जो औसत मानक है। उसमें 20.5 प्रतिशत सिकुड़ा गेहूं है। वहीं 4 से 6 प्रतिशत गेहूं में अन्य जिंस व खतपतवार मिला है। बांदा में हुई अधिकारियों की बैठक के बाद यह अवगत कराया गया। लेकिन अभी तक कोई नया आदेश न मिलने पर खरीद के लिए तैयार बैठे केंद्र प्रभारी गेहूं खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
केंद्रो में सन्नाटा है, वहीं पल्लेदारों की हड़ताल के चलते मंडी की ज्यादातर दुकानें बंद है। जो व्यापारी मजबूरी में गेहूं खरीद रहे है और किसान स्वयं तौल कर रहा है।