मौसम की बेरुखी ने एक बार फिर किसानों को रुला दिया। जिले के ज्यादातर हिस्से में जमकर बारिश हुई। कई स्थानों पर अभी भी बारिश जारी है। खेतों में फसल कटाई के साथ थ्रेसरिंग का कार्य कर रहे किसानों का काम ठप हो गया है। वहीं बारिश के बीच हड़बड़ाहट में खेत से ट्रैक्टर बाहर निकालते समय पलट गया।
किसानों पर प्रकृति का सितम कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन से मंडरा रहे बादल रविवार को एक बार फिर मुसीबत बनकर बरसे। फसल समेटने में जुटे किसान बुरी तरह परेशान है। छिबौली गांव के किसान पन्नालाल राजपूत ने बताया कि कड़ी मशक्कत के बाद मुंह मांगी मजदूरी देकर गेहूं की कटाई कराई है। फसल खेत से समेट रहे थे।
रात में थ्रेसिंग होनी थी। लेकिन बारिश से फसल गीली हो गई है। अब थ्रेसिंग होना संभव नहीं है। पवई गांव के महेंद्र, शिशुपाल, शशिंकात का कहना है कि पता नहीं उनका नसीब खराब है या भवगान उनके पीछे पड़ा है। बची खुची फसलें भी समेटने नहीं दे रहा है।
बौखर गांव के हरिसिंह व बाबू का कहना है कि इस साल परिवार में दो-दो शादी करनी है और इसी साल कुदरत कहर बरपाने में जुटी है। कैसे शादी होगी और कैसे कर्ज चुकेगा, समझ में नहीं आ रहा है। करियारी गांव के नीतू, जयप्रकाश व देवेंद्र आदि का कहना है कि कहने को कुछ रह नही गया है। किसान तो बुरी तरह टूट गया है।
कुरारा प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में रविवार को तेज बारिश के बीच थ्रेसरिंग का काम कर रहे किसानों पर पहाड़ टूट पड़ा। कसबे के इकराम हुसैन बरसात होने पर हड़बड़ाहट में ट्रैक्टर को खेत से निकालने लगे। तभी वह खाई पर रपटकर पलट गया। वहीं जखेला निवासी भोला गुप्ता ने बताया कि वह 72 मील मौजे में गेहूं की थ्रेसिंग कर रहा था। जो बारिश के बीच खेत में फंस गया है। किसान ने कहा कि पानी बरसने से गेहूं और खराब हो जाएगा।
मौदहा प्रतिनिधि के अनुसार मौसम के तेवर ने किसानों के लिए फिर नई मुसीबत खड़ी कर दी। शनिवार को बर्बाद हुई फसल समेटते तेज हवा से उड़ गई। वहीं रविवार की शाम बारिश होने से फसलों की मड़ाई का कार्य भी ठप हो गया। कल तक मौसम के तेवर यहीं रहे, तो बची खुची फसलें भी आसानी से किसान नही समेट सकेगा।
गुसयारी गांव के प्रधान हसीन खां ने बताया कि उनके गांव सहित सिचौली, नायकपुरवा, जिगनौड़ा, कपसा आदि गांवो में तेज आंधी से खेतों में समेटी गई गेहूं की फसल उड़कर तहस नहस हो गई। किसान तेजवा ने बताया कि वह बचे हुए गेहूं की फसल को समेटकर थ्रेसिंग करा रहा था। तभी बारिश शुरू हो गई।
जबकि कसबे के कृषक लल्लू निषाद, जुम्मन आदि का कहना है कि किसी तरह उन्होंने खेतों में पड़ी गेहूं की फसल समेटकर एकत्र की थी और मड़ाई का कार्य होना था। लेकिन बारिश होने से अब यह कार्य रुक गया। मौसम विभाग की मानें तो सोमवार तक बारिश व तेज हवाएं चलीं, तो बची खुची फसलें भी एक सप्ताह तक मड़ाई करने लायक नहीं हो पाएंगी।
बर्बादी के बाद किसान संभल नही पा रहा था और फिर से मौसम ने अपने तेवर बदल दिए। जिससे किसान बेहद चिंतित और परेशान है। यही हाल जिले के मुस्करा, छानी, बिवांर, गोहांड, जलालपुर जैसे इलाकों का है बरसात ने किसानों को परेशानी में डाल दिया है।