हमीरपुर में शनिवार की देर रात शुरू हुई बारिश रविवार को भी जारी रही। शाम करीब 6 बजे कुछ स्थानों पर ओले भी गिरे। इससे बची खुची फसलें नष्ट हो गईं। बेमौसम बरसात से लोगों को ठंड का भी अहसास हुआ। जगह-जगह जलभराव होेने से लोगों को दुश्वारियां झेलनी पड़ीं।
लोग गंदगी से भी बेहाल रहे। बीते दिनों हुई बारिश से काफी फसलें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। किसान बची फसलों की कटाई में लगे हैं। अधिकांश फसलें खलिहानों में भी पहुंच गई हैं, जो शनिवार की रात से शुरू हुई बारिश से नष्ट हो रही हैं।
रविवार को कुरारा कसबा सहित रघवा, पडुई, रिठारी में हल्की ओलावृष्टि हुई। मौदहा तहसील के रीवन और गहबरा गांवों में भी हल्की ओलावृष्टि हुई। बारिश के कारण कूड़ा दिनभर गलियों व मुख्य मार्गों में फैलकर सडांध फैलाता रहा। हालांकि अभी भी बरसात जारी है। महोबा के विकासखंड पनवाड़ी के ग्राम कनकुआ, रूरीकला, गड़ौरा, टिकरी और कनौरा में हुई ओलावृष्टि से फसलाें को जबरदस्त क्षति हुई है।
बेमौसम बारिश ने जिले के किसानों को तबाही की कगार पर ला दिया है। जिले में 1 लाख 9 हजार से ज्यादा किसान अन्न उगा रहे हैं। इसके अलावा भी खेती-किसानी से तमाम किसान जुड़े हैं। आसमान से गिर रही आफत ने इन सभी को सड़क पर ला दिया है।
तबाही का सिलसिला यहीं नहीं थमा है, क्योंकि शनिवार से रुक रुककर हो रही बरसात अभी थमने का नाम नहीं ले रही है। किसानों को समझ में नहीं आ रहा कि वह साल भर कैसे परिवार की गाड़ी खींचेंगे। चारो तरफ मुआवजे की मांग उठ रही है और किसानों को फिलहाल राहत की किरण नजर नहीं आ रही है।
हालत यह है कि खेतों में पकी खड़ी फसलों में पानी भरा है। ऐसे में फसलों का सड़ना तय है। वहीं खलिहानों में पड़ी फसलों से सड़ांध पैदा हो रही है। रबी अभियान में किसानों ने 2 लाख 64 हजार 273 हेक्टेयर पर फसलें बोई हैं। इसमें 103072 हेक्टेयर में गेहूं, चना 75076 हेक्टेयर, मटर 19124 हेक्टेयर, मसूर 28669 हेक्टेयर व लाही/सरसों 19194 हेक्टेयर में है।
19133 हेक्टेयर क्षेत्रफल में अन्य फसलें बोई गई हैं। जिले में बीते 13 दिसंबर से शुरू हुआ बरसात का सिलसिला किसानों को रुला रहा है। काली जमीन पर पैदा होने वाली मसूर की फसल में उकटा रोग के कारण किसान मटर की फसल उगाने लगे हैं। इससे मसूर का रकबा घटा है। खेतों में पकी खड़ी मटर की फसल बारिश से तबाह हो रही है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1 लाख 9 हजार 940 किसान खेती किसानी कर परिवार चला रहे हैं। 89 हजार 590 कृषि श्रमिक हैं। 39504 किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) है। ये किसान कृषि बीमा योजना में प्रीमियम जमा कर रहे हैं जबकि केसीसी वाले कुल किसानों में 11549 डिफाल्टर हैं। बैंकों से 23261.94 लाख रुपये का बैंकों ने किसानों को लोन जारी किया है।
राजस्व विभाग ने फसलों में हुई क्षति का आकलन कर शासन को रिपोर्ट भेजी है। इस सर्वे रिपोर्ट में गेहूं और सरसों/लाही की फसल में नुकसान नहीं बताया गया है। जबकि चना, मटर व मसूर की फसल में 50 फीसदी से अधिक नुकसान बताया गया है। इसके लिए 48 करोड़ 82 लाख 77 हजार 385 रुपये मांगे गए हैं।
बेमौसम बरसात से क्षतिग्रस्त फसलों का दोबारा सर्वे कराए जाने की मांग को लेकर भाकि यू जिलाध्यक्ष निरंजन सिंह राजपूत ने सोमवार को विशाल प्रदर्शन करने की बात कही है। उन्होंने बताया कि 28 फरवरी, 1 से 3 मार्च तक हुई बेमौसम बारिश के कारण किसानों की फसलों के सर्वे में दलहनी फसल 50 फीसदी से अधिक व तिलहन में 8 से 12 फीसदी व गेहूं में 18 से 20 फीसदी तक नुकसान दिखाया गया है। जबकि 14/15 मार्च को हुई बारिश से सभी फसलें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हैं।