असमय हुई वर्षा से बर्बाद फसलों ने जहां किसानों को झकझोर कर रख दिया है। वहीं शेष बचीं फसल की कटाई में किसानों के पसीने छूट रहे है।
प्रति बीघा गेहूं की कटाई पर एक क्विंटल कटाई देनी पड़ रही है। गांव के किसान रामऔतार, राजाराम, सुरेश का कहना है कि एक तो प्रकृति ने पहले ही उनकी फसलों को बर्बाद कर दिया है। बची खुचीं फसलों को कटाई कराने में मनमानी मजदूरी देनी पड़ रही है।
टीम बनाकर गेहूं की कटाई के काम में लगे मजदूर बाबूलाल का कहना है कि बीते दिनों हुई बारिश व तेज आंधी से फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गई है।
फसलों के खेतों में फैल जाने से इन्हें समेटने में खासी दिक्कत हो रही है। ऐसे में 8 लोगों के बीच एक बीघे की फसल काटने में पूरा दिन लग जाता है।
अब अगर दिन भर में ठीक-ठाक दिहाड़ी न मिले तो क्यों सारा दिन धूप में बैठकर काम करें। पौथिया गांव की संतोष कुमारी ने बताया कि 4 बीघे में धनिया बोई थी। जिसमें सिर्फ 9 किलो ही पैदावार हुई। जिसमें 5 किलो कटाई मजदूरों को दे दी। बची 4 किलो धनिया से जुताई, बुआई व बीज का खर्च तक नहीं निकला है।