जिले में भूगर्भ जलस्तर नीचे जा रहा है। सरकारी व निजी नलकूपों से भूजल का
अत्यधिक दोहन किया जा रहा है। जबकि वाटर रिचार्जिंग के ठोसप्रयास नहीं कि ए
जा रहे हैं। इधर, कई वर्षों से औसत से कम बरसात हो रही है। ऐसे में पिछले
वर्ष की अपेक्षा जिले के भूगर्भ जलस्तर में औसतन 60 से 85 सेंमी की गिरावट
आई है।
जिले में औसत सामान्य वर्षा 685 एमएम है लेकिन कुछ वर्षों के
दौरान देखा जा रहा है कि मानसूनी बरसात कम हो रही है। यही कारण है जिले के
दो विकास खंडों सुमेरपुर व सरीला को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है।
साथ
ही मौदहा ब्लॉक को अतिदोहन श्रेणी में रखा गया है। जिले में कुछ स्थानों को
छोड़ अन्य में भूगर्भ जलस्तर नीचे चला गया है। भूगर्भ जलस्तर ऊपर उठाने के
लिए शासन भी गंभीर है।
शासन ने भी इस दिशा में मुख्यमंत्री जल बचाओ अभियान
योजना का संचालन किया है। शासन से आए आदेशों पर अधिकारी अमल तो कर रहे हैं
लेकिन जिस गति से काम चल रहा है उससे मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है।
जून
माह में तालाबों की खुदाई पूरी कर लेनी थी, लेकिन इस कार्य को पूरा नहीं
किया जा सका। इधर घट रहे भूगर्भ जलस्तर चिंता का विषय है।
बारिश के पानी को
संरक्षित करने के लिए 300 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बनी सरकारी और
गैर सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाने के आदेश
वर्ष 2010 में जारी हुए तो प्रदेश सरकार ने कृषि उत्पादन आयुक्त को नोडल
अधिकारी बनाया, लेकिन इसका पालन नहीं हो रहा है।
शहरी इलाकों में भवनों का
नक्शा पास करने में जल संरक्षण जैसी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा
है। डीसी मनरेगा महेंद्रदेव ने बताया कि जिले में तालाबों के जरिए
जलसंरक्षण कर भूगर्भ जल स्तर ऊपर उठाने के लिए मनरेगा से प्रयास जारी है।
214 तालाबों की खुदाई करीब 15 करोड़ रुपये से कराई जा रही है। ग्राम विकास
179 तालाब 90 लाख की लागत से व 35 तालाब लघु सिंचाई विभाग 14 करोड़ मनरेगा
से खर्च कर करा रही है।