नवरात्रि के आखिरी दिन मुख्यालय सहित ग्रामीण इलाकों में जवारा व काली का विमान धूमधाम से निकाला गया। मुख्यालय के हाथी दरवाजा स्थित महावीर मंदिर से रविवार की शाम विभिन्न मार्गोा से होकर गुजरा। जगह जगह भक्तों ने डोले में प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी। डोला जुलूस के साथ विभिन्न प्रकार की देवी देवताओं की बाल रूपी झांकियां भी शामिल रही।
पौथिया प्रतिनिधि के अनुसार गांव में जवारे निकाले गए। महिलाएं सिरो में खप्पर रखकर गांव के विभिन्न देवी मंदिरों में भ्रमण किया और अंत में जवारे बेतवा नदी में विसर्जित किए। इस मौके पर सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
सरीला प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के भेड़ी गांव में संाग छेदकर श्रद्धालुओं ने भव्य जवारे निकाले। भेड़ी गांव में बेतवा नदी किनारे महेश्वरी माता का बना मंदिर आस्था का केंद्र है। क्षेत्र के अलावा यहां दूर दराज से भारी संख्या में लोग आते है। चैत्र नवरात्रि में यहां वार्षिक मेले का भी आयोजन होता है।
नवरात्रि के समापन पर रविवार को यहां निकाले जाने वाले जवारों की अलग पहचान है। महेश्वरी माता मंदिर परिसर में शुरू हुए जवारो में युवतियां सिर में जवारे के खप्पर लेकर देवीगीत गाचे चल रही थीं। युवा गालों में सांग धारण कर चल रहे थे। जो मुख्य आस्था का कें द्र रहा। जवारों में दो दर्जन घोड़े भी थिरक रहे थे।
गांव भ्रमण के बाद जवारो का विसर्जन बेतवा नदी में कर दिया गया। बाद में महेश्वरी माता मंदिर में आरती का आयोजन किया गया। इस मौके पर उमड़ी हजारों की भीड़ को भारी पुलिस बल लगाया गया था।