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आरोपियों को मिले फांसी तभी न्याय

Tue, 28 Jul 2015 12:14 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
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छेड़खानी से आहत छात्रा के आत्मदाह करने के बाद से पीड़ित परिवार पर तो मानों दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। ग्रामीणों द्वारा छात्रा के शव ले जाकर सड़क पर रखकर जाम लगाने के बाद परिवार को जहां पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं वहीं छात्रा का शव भी उनकी बगैर मर्जी से यमुना नदी में फेंक दिया गया। बेटी की दर्दनाक मौत, पुलिस की लाठियों से जगह जगह काले पडे़ जिस्म और तो और बेटी का अंतिम संस्कार न कर पाने की पीड़ा से पूरा परिवार बुरी तरह टूट चुका है। परिवार की पीड़ा को देखकर मृतका की बहन साक्षी ने कहा कि आरोपियों को फांसी की सजा मिले तभी तभी उन्हें न्याय मिलेगा।
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लंबी यातनाएं झेल रहे परिवार को भाजपाइयों के दबाव में पुलिस ने छोड़ तो दिया है लेकिन इन लोगों पर अभी भी संकट के बादल छाए हैं।

केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के कहने पर पुलिस ने मारपीट कर घायल करने वालों का मेडिकल तो करा दिया, लेकिन पुलिस का भय अभी भी परिजनों को सता रहा है।

यही कारण है कि पूरा परिवार पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए भाजपा की शरण में है। कलेक्ट्रेट परिसर में धरना स्थल पर बैठे मृतक छात्रा के नाना बाबू खरे ने कहा कि आरोपियों को कड़ी सुरक्षा दी जा रही है।
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जबकि वह लोग अभी भी अपने को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। कहा कि अभी भी पुलिस का भय सता है। उनकी बेटी को न्याय दिलाने में जिन लोगों ने संघर्ष किया है उन्हें पुलिस गलत तरीके से फंसा रही है।

जब वे छूटेंगे तभी उनका विश्वास प्रशासन के प्रति वापस लौटेगा। रविवार की रात पूरा परिवार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई से मिला। इसके बाद पिता राजकुमार खरे, उनके भाई शिवकुमार, रामकुमार, लड़का रविशंकर, बहन साक्षी व दीपाक्षी और पत्नी किरन गांव जाने से किसी अनहोनी को लेकर भयभीत हैं।
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