सीजेएम की अदालत में एक व्यक्ति ने वाद दायर किया है। इसमें डॉ. ओमवती के खिलाफ सुविधा शुल्क न देने पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप है। उन्होंने जिम्मेदारी मानते हुए डॉ. ओमवती के साथ महिला अस्पताल की सीएमएस रेखा रानी और उप निदेशक स्वास्थ्य को भी लपेटा है।
सीजेएम रामकिशोर की अदालत में गांव दबरई निवासी कुंवरपाल पुत्र सीताराम ने महिला अस्पताल की चिकित्साधिकारी डॉ. ओमवती पर आरोप लगाया है कि सुविधा शुल्क न मिलने पर उनकी पत्नी के इलाज में लापरवाही बरती गई। इसके लिए उन्होंने महिला अस्पताल की अधीक्षक रेखा रानी और उप निदेशक स्वास्थ्य विभाग उप्र को भी जिम्मेदार बनाया है और सभी के विरुद्ध लापरवाही बरतने के आरोप में कोर्ट में परिवाद दायर किया है। सीजेएम ने इस प्रकरण में सुनवाई की तारीख 12 अगस्त दी है।
परिवादी ने बताया कि उसकी पत्नी गीता को पांच अप्रैल, 2014 में प्रेरक आशा द्वारा परिवार नियोजन आपरेशन के लिए गांव से जिला महिला अस्पताल में लाया गया था। जहां ड्यूटी पर तैनात डॉ. ओमवती ने परिवादी से सुविधा शुल्क के नाम पर आठ सौ रुपये ले लिए और रुपयों की मांग की। और पैसा न दिए जाने पर उन्होंने नाराजगी दिखाते हुए गुस्से में परिवादी की पत्नी का आपरेशन तो कर दिया, लेकिन उसकी आंत काट दी। छह अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दे दी। पीड़ित की पत्नी का जब असहनीय दर्द हुआ तो वह महिला अस्पताल की अधीक्षक रेखा रानी के पास गया तो उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया। कहा, जिससे आपरेशन कराया है, उसी को जाकर दिखाओ। डॉ. ओमवती ने पीड़ित को तीन बार अस्पताल बुलाया। मगर कोई उपचार नहीं किया। इस वजह से उसकी पत्नी को सेप्टिक हो गया और उसके टांके खुल गए। परिवादी ने 16 अप्रैल से तीन मई तक बरेली में उपचार कराया, लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ। डॉ. ओमवती की लापरवाही के कारण उसकी पत्नी स्थाई रूप से अपाहिज हो गई है। परिवादी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। न ही कोई कार्रवाई की गई।