हाइवे पर स्थित यमुना पुल के लगातार डैमेज होने से
लोगों के अंदर डर पैदा हो गया है। इसी पुल के जरिए महानगरों के लिए आवागमन
होने से परेशानियां आम जनता को झेलना पड़ता है। यही कारण है कि शहर के लोग
इस पुल को लेकर बेहद संजीदा है। लोग पुल में जरा सी कमी दिखते ही सूचनाओं
का आदान प्रदान करना शुरू कर देते हैं। गुरुवार को इसी ही सूचना से हड़कंप
मचा फिर बाद में पीएनसी के जेई ने बताया पुल क्षतिग्रस्त नहीं हुआ मात्र
दरार थी। वैसे भी हम ढाई माह से पुल की मरम्मत कर रहे हैं।
वर्ष 1976
में बने यमुना पुल की मियाद अब पूरी होने जैसी नजर आने लगी है। 19 जून को
पुल के कोठी नंबर तीन की स्लैब धंस गई थी।
जिससे पुल के ऊपर से 12 दिन तक
भारी वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई। मरम्मत के बाद जब एक
जुलाई को पुल पर आवागमन शुरू हुआ।
तभी 24 घंटे बाद पुल की अन्य कोठी की
स्लैब में कमियां आ गई, जिससे करीब 25 दिन तक पुल से भारी वाहनों की
आवाजाही बंद रही थी। अभी पुल की मरम्मत कार्य पूरा नहीं हुआ है।
गुरुवार की
सुबह कोठी नंबर तीन की स्लैब में दरार आने की खबर फैल गई। जिससे भारी
वाहनों के संचालक परेशान हो गए। इसेे देखते हुए निर्माण इकाई पीएनसी ने
जांच पड़ताल की और स्लैब में मात्र दरार आने की बात कही गई।
बताते हैं कि
पुल में लगातार मरम्मत का कार्य चल रहा है। अगर कोई क्षतिग्रस्त जैसी बात
होती तो यातायात रोकते लेकिन ऐसा नहीं है, पूरे पुल की मरम्मत चल रही है।
पीएनसी के अवर अभियंता मनीष सिंह ने बताया कि जिस वक्त पुल का निर्माण किया
गया, उस समय इतना अधिक लोड नहीं था। तभी पुराने लोड के हिसाब से पुल का
निर्माण सेतु निगम से कराया गया था।
बताया कि मौजूदा में 60 से 80 टन तक
ओवरलोड वजन के भारी वाहन गुजर रहे हैं। जिससे पुल बार-बार क्षतिग्रस्त हो
रहा है। कहा कि उन्होंने पुल के ऊपर से ओवरलोड वाहनों के निकालने पर पहले
ही पाबंदी लगा रखी है।
इस पर अंकुश लगाने का काम प्रशासन का है। बताया कि
पूरे पुल की मरम्मत के लिए दो इंजीनियरों की टीम 20 जून से लगी है। जो
नियमित तौर पर पुल की मरम्मत के साथ साथ देखरेख कर रही है।
बताया कि यमुना
नदी में एक नए पुल बनाए जाने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार को प्रस्ताव
भेजा है। इसके लिए यहां के जनप्रतिनिधि अगर प्रक्रिया में सहयोग करें तो
पुल के निर्माण के लिए मंजूरी मिल सकती है।