मौदहा विकासखंड क्षेत्र के रागौल स्थित बीआरसी केंद्र
में बैठक कर शिक्षामित्रों ने सहायक अध्यापक पद से हटाए जाने के निर्णय के
विरोध में सोमवार को जोरदार प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु की
अनुमति मांगी है। बैठक के बाद मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन कर कानपुर सागर
राजमार्ग जाम करने पहुंचे, लेकिन पहले से सतर्क पुलिस ने जाम नहीं लगने
दिया।
सोमवार को जिलाध्यक्ष संगठन के जिलाध्यक्ष रवींद्र तिवारी के
नेतृत्व में रागौल स्थित बीरसी में बैठक हुई। उन्होंने कहा कि उच्च
न्यायालय के फैसले से हजारों शिक्षामित्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेंगे। प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र
शाही के आह्वान पर 15 सितंबर से शिक्षामित्र विद्यालयों में कार्य बहिष्कार
करेंगे। बैठक के बाद शिक्षामित्र प्रदर्शन कर एसडीएम कार्यालय के पास जम
गए और एसडीएम को पांच सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।
कहा गया कि 12
सितंबर को उनके समायोजन के विरुद्ध जो फैसला हुआ है उससे वह बुरी तरह आहत
हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में मांग की है कि समस्त
शिक्षकाें की सेवा सुरक्षित रखी जाए।
सरकार उच्चतम न्यायालय में
शिक्षामित्रों की उच्च स्तरीय पैरोकारी करें। प्रधानमंत्री से अनुरोध किया
गया है कि वह उन्हें इच्छा मृत्यु की अनुमति प्रदान करें।
मानव संसाधन
मंत्रालय पर आरोप लगाया कि उनकी दोषपूर्ण नीति के कारण शिक्षामित्रों के
साथ सौतेला व्यवहार किया गया। जबकि उत्तराखंड, महाराष्ट्र व मप्र में
संविदा कर्मियों को समायोजन बिना टीईटी के नियुक्ति कर दी गई है।
मंगलवार
को जिला मुख्यालय के अंबेडकर पार्क में विशाल धरना-प्रदर्शन होगा। जिसमें
सभी शिक्षामित्रों से पहुंचने का आह्वान किया गया।
इस दौरान रामऔतार
प्रजापति, देवेंद्र कुमार, बृजराज, अजय अवस्थी, हमीद खां, देवशक्ति, संगीता
नामदेव, ब्रह्मप्रकाश, प्रशांत, सुखलाल, रामप्रकाश, आभा त्रिपाठी, सुमन
देवी, श्याम भाई, रजनी, ऊषा देवी, मायादेवी, शाहीन बानो आदि शिक्षामित्र
मौजूद रहे।