आज से श्रावण मास शुरू होगा। इस मास में पुण्य की बारिश होगी। सृष्टि के
रक्षक व भक्तों के पालनहार महादेव शंकर की स्तुति श्रद्धालुआें को
मनोवांछित फल देगी। गृह नक्षत्रों की जुगलबंदी महादेव के साधना काल में
भक्तों को समृद्धि देकर पापों का विनाश करेगी। नगर के पातालेश्वर,
संगमहेश्वर मंदिरों व ग्रामीण इलाकों में शिवालयों में शिव आराधना और
रुद्राभिषेक की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
ज्योतिषाचार्य पंडित
दिनेश दुबे के मुताबिक सावन में शोभन, सौभाग्य, व्याघ्र व शिवनामक योग यम
नियम से महादेव का ध्यान पूजन करने पर उत्तम फल प्रदान करेंगे।
कन्याएं
व्रत रहकर प्राचीन शिवलिंग का सच्चे हृदय से दर्शन पूजन करेंगी तो उन्हें
मनचाहे वर की प्राप्ति होगी। जबकि सुहागिन के पति को हर भवसागर से निदान
मिलता है।
सावन माह में शिव की स्तुति करने के लिए कावंरियाें का जमघट लगता
है। भगवा वस्त्र धारी कांवरिये पैदल कांवड़ में जल देकर शिवमंदिरों में
चढ़ाएंगे। सैकड़ाें कांवरिये नंगे पांव काशी व बाबा धाम जाएंगे।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि सावन माह का शनिवार एक अगस्त को आरंभ होकर
श्रावणी पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन के दिन 29 अगस्त शनिवार को समाप्त होगा।
जो अत्यंत दुर्लभ संयोग है।
वहीं 11 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत हर्षण योग
में होगा। जबकि 27 अगस्त को द्वादशी व त्रयोदशी संयोग में प्रदोष व्रत
सौभाग्य नामक योग में होगा। सावन में रुद्राभिषेक से भक्तों को विशेष लाभ
मिलता है।
कुश मिश्रित जल से अरोग्य की प्राप्ति, गन्ने के रस से धन की
प्राप्ति, गोदुग्ध से संतान की प्राप्ति, सरसों के तेल से शत्रुनाश, देशी
घी से वैभव की प्राप्ति और चीनी मिश्रित जल से रुद्राभिषेक करने से ज्ञान
की प्राप्ति होती है।
पंडित दिनेश दुबे
बताते हैं कि शिव की आराधना नियम से करनी चाहिए। सावन में 16 सोमवार व्रत
आरंभ करने का सबसे उपयुक्त समय होता है। सावन में व्रत रखने वाले साधक को
ओम नम: शिवाय से भगवान शिव व ओम नम: शिवायै से पार्वती का षोड़शोपचार पूजन
करना चाहिए।
शिवलिंग को दूध, दही, शहद, शक्कर, घी से स्नान कराएं। उसमें
गंध, चंदन, सफेद, फूल, भस्म, बेलपत्र, मदार, भांग चढ़कर पूजन करे। सुबह शाम
ओम नम: शिवाय का 108 बार जाप करना लाभकारी होता है।
सावन
का पहला सोमवार तीन अगस्त से शुुरू होगा। पूर्वभादप्रद नक्षत्र व शोभन योग
रहेगा। कर्क राशि में सूर्य, बुध व मंगल के संचरण करने से त्रिग्रहीय योग
बनेगा। यहीं से भारी वर्षा का योग बन रहा है।
दूसरा सोमवार 10 अगस्त को
मृगशिरा नक्षत्र, व्याघ्र योग में पडे़गा। तीसरा सोमवार 17 अगस्त को उत्तरा
फाल्गुनी नक्षत्र शिव नामक योग का दुर्लभ संयोग बनाएगा।
नागपंचमी का पर्व
19 अगस्त होगा। जबकि चौथा सोमवार 24 अगस्त को ज्येष्ठा नक्षत्र में होगा।
इस दिन वैधृति योग बनेगा।