मंडी स्थित सरकारी गेहूं खरीद केंद्रों में गेहूं की खरीददारी तेज हो गई है। अब तक 4300 क्विंटल गेहूं की खरीद हो चुकी है। अकेले दो केंद्रों में गेहूं बेंचने वाले किसानों का 12 लाख रुपया उधार हो गया है। इस आपदा के समय किसानों को रुपयों के लिए केंद्रों केचक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हालांकि सरकारी खरीद केंद्र पर गेहूं के मानकों में 10 प्रतिशत छूट की राहत दी गई है।
दस फीसदी की छूट के पीछे किसानों को यह नहीं बताया जा रहा है कि उनके भुगतान में 29 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती क्यों की जा रही है। शासन ने छह प्रतिशत सिकुड़न वाले गेहूं की खरीद के आदेश दिए थे। बाद में जांच पड़ताल के बाद 10 प्रतिशत सिकुड़न वाले गेहूं खरीदने की घोषणा की गई।
जिससे खरीदारी तेज हो गई। लेकिन किसानों के गेहूूं के भुगतान के समय भुगतान कम होने पर यह राज खुला कि 6 से 8 प्रतिशत गेहूं में सिकुड़न पाए जाने पर 14.50 रुपये की कटौती की जाएगी। इससे अधिक 10 प्रतिशत प्रति क्विंटल में सिकु ड़न पर 29 रुपये की कटौती की जाएगी।
किसानों को 20 रुपये पल्लेदारी के देने पड़ रहे हैं। एफसीआई केंद्र पर अभी तक 1500 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई है। सिलाई मशीन खराब होने व मंडी द्वारा दिए गए इलेक्ट्रानिक कांटा खराब होने पर बांट व कांटे से तौल की रही है। सिलाई मशीन खराब होने पर बोरियां हाथ से सिली जा रही हैं।
वहीं क्रय विक्रय में 1200 क्विंटल गेहूं खरीदा जा चुका है, लेकिन यहां खरीद के लिए सिर्फ 5 लाख रुपये भेजे गए हैं। रकम खत्म होने पर 10 लाख रुपये किसानों का बकाया है जबकि पीसीएफ केंद्र पर 900 क्विंटल से अधिक गेहूूं तो खरीद लिया गया।
लेकिन इस केंद्र में भी किसानों का दो लाख से अधिक का उधार है। हालांकि विपणन विभाग ने 800 क्विंटल से अधिक गेहूं खरीद लिया है। लेकिन यहां किसी तरह की कोई कमी नहीं है। लेकिन बिजली कम आने से मशीनों से बोरियों की सिलाई नहीं हो पा रही है।