गुरुवार की शाम हाफिजों ने मस्जिदों में आमद दर्ज करा ली। रात 9 बजे से सभी
मस्जिदों में तरावीह की विशेष 20 रकात नमाज शुरू हो गई। यह ईद का चांद
दिखने तक रोजाना होगी। माहे रमजान की बरकतें जितनी भी बताई जाए वह कम हंै।
एक हदीस में आया है कि रोजेदार का बिछौना उसके लिए दुआएं करता है। रोजेदार
इस कदर खुशनसीब है कि सुबह व शाम 70-70 हजार फरिश्ते मगफिरत की दुआ मांगते
रहते है।
रमजान में पांच हर्फ है। र, मीम, जाद, अलिफ व नून है। र से
मुराद है रहमते इलाही, मीम से मुराद है मुहब्बते इलाही, जाद से मुराद है
जमाने इलाही, अलिफ से मुराद है अमाने इलाही और नून से मुराद है नूरे इलाही।
रजमान में पांच इबादात खुुसूसी होती है। जिसमें रोजा, तरावीह तिलावते
कुरआन, ऐतकाफ और शबे कद्र में इबादात। तो जो कोई सच्चे दिल से यह पांच
इबादात करें वह उन पांचों ईनामों का मुसतहिक है।
जामा मस्जिद सुमेरपुर
के पेश इमाम हाफिज शेफ उल्ला ने बताया कि रसूलाल्लाह सल्ल. ने फरमाया है कि
जब मोबिन माहे रमजान में बेदार होता है और लेटे लेटे करवटंे बदलता है तथा
अल्लाह के जिक्र में लगा रहता है तो उससे फरिश्ता कहता है उठ अल्लाह तुझ पर
रहम करें,
फिर जब वह उठकर खड़ा होता है तो उसका बिछौना उसके लिए दुआ करता
है कि अल्लाह इसको जन्नत के आला बिछौने अदा फरमाए। जब वह लिबास पहनता है तो
लिबास उसके लिए दुआ करता है कि ऐ अल्लाह इसको जन्नत का लिबास अदा फरमा।
जब
वह जूता पहनता है तो जूता उसके लिए दुआ करते है कि ऐ अल्लाह इसको पुल
सिरात पर साबित कदम रखना और जब बरतन लेता है तो बरतन दुआ करते हुए जन्नत के
बरतन अदा फरमाने की बात करता है। इसी तरह बजू के वक्त उसके लिए दुआ करता
है कि इसके गुनाहों और खताओं से पाक साफ कर दें।