हमीरपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी जोरों पर है। जहां पंचस्थानि
चुनावालय और जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में पंचायतों के आरक्षण को
लेकर माथापच्ची जारी है वहीं निर्वाचक नामावलियों का कार्य कराए जाने के
लिए बीएलओ स्तर पर कर्मचारियों और अधिकारियों को लगाया जा रहा है। इसी के
चलते ग्राम पंचायतों में दावेदार वोटरों पर खासे मेहरबान हैं। किसी व्यक्ति
के बीमार होने पर अस्पताल में ऐसे दावेदार आगे पीछे रहते हैं और हर मदद को
तैयार हो रहे हैं। हर छोटे बड़े काम पर बिना बुलाए वोटर के घर पर शरीक हो
रहे हैं। अपने को सशक्त बनाने के लिए गोलबंदी तेज कर दी गई है। दावेदारी
मजबूत करने के लिए संभावित दावेदारों से अपने वोटरों की पहरेदारी के लिए
गोटें बिछा उनकी राह रोकने में जुटे हैं। चुनावी तैयारियों के मद्देनजर
ग्राम पंचायत क लौलीजार की स्थिति बयां करती एक रिपोर्ट-
भरुआसुमेरपुर
विकासखंड के कलौलीजार राठ मार्ग से डेढ़ किमी है। जबकि इस पंचायत से
सम्मिलित गांव ललपुरा है। चुनाव के समय ज्यादातर मतदाता जातिवाद में बह
जाते हैं। देखा जाए तो जातिवाद के चक्कर में विकास कार्य जैसे मुद्दे बौने
हो जाते हैं। ललपुरा गांव से कलौलीजार पहुंचने के लिए बनाया गया मुख्य
मार्ग कई स्थानों पर धंसकर टूट चुका है।
ग्राम प्रधान धर्मीबाई अपने मायके
ललपुरा में रहती हैं। जबकि निवास जनपद मुख्यालय में है। इसके चलते वह
पंचायत में कभी कभार ही आती जाती हैं। उम्र दराज महिला प्रधान का कामकाज
उनके पुत्र दिनेश भदौरिया देखते हैं। कलौलीजार गांव में सुबह एक शादी वाले
घर पर पहुंचे तो वहां नरेंद्र कुशवाहा से भेंट हो गई। गांव में विकास कार्य
के बारे में पूछते ही उसने मकान के सामने रास्ते की ओर इशारा किया कहा
देखिए कितना दलदल है।
लोग चबूतरों से निकलते हैं तो महिलाएं गाली गलौज पर
उतर आतीं हैं। कहते है कि दूसरे रास्ते से घूमकर आना पड़ रहा है। गांव के
झुरिया ने कहा भइया इस रास्ते में खड़ंजा डाला गया था लेकिन पूरी तरह धंस
चुका है। दो सफाई कर्मी है। जिसमें एक कलौलीजार तो दूसरा ललपुरा में रहता
है। उसने कहा कि सफाई कर्मी कभी गांव में आता ही नहीं है।
ग्रामीण खुद ही
सफाई करने को मजबूर हैं। पेयजल के लिए 76 हैंडपंप हैं लेकिन चार हैंडपंप
रिबोर के लिए पड़े हैं। कलौलीजार और ललपुरा को पौथिया सामूहिक पेयजल योजना
से जोड़ा गया। लेकिन पानी न दे पाने की दशा में ललपुरा में एक नलकूप
स्थापित किया गया है। लेकिन नलकूप बंद पड़ा है। तालाबों की संख्या छह है
लेकिन सभी सूखे हैं।
बरसात होने पर कलौलीजार के मुख्य रास्ते जलमग्न हो
जाते हैं। ग्राम पंचायत में अन्य कार्यदाई किसी भी संस्था ने विकास कार्य
के लिए कोई काम ही नहीं कराया है। क्षेत्र पंचायत ने मवई रोड से होरी डांडा
तक सीसी रोड प्रस्तावित किया पर विवादों के बीच आधा अधूरा ही काम हो सका।