मझगवां थाने के टोलारावत गांव से नौ दिन पूर्व अपहृत छात्र भूपेंद्र के मामले में पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। तीन दिन पहले फिरौती के रूप में 10 लाख की डिमांड की गई और पैसा नहीं मिलने पर अपहरणकर्ताओं ने उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद छात्र का शव खेत में भरे पानी में डाल दिया गया। दुर्गंध फैलने पर गांव वाले मौके पर पहुंचे और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
पोस्टमार्टम के बाद शव गांव में पहुंचा तो ग्रामीण आक्रोशित हो गए। पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। कहा कि जब तक हत्यारे गिरफ्तार नहीं किए जाएंगे, वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। टोलारावत गांव निवासी देवपाल साहू की गांव में ही परचून की दुकान है। वह इसी से परिवार का भरण पोषण करता है। देवपाल का एक मकान राठ कस्बे में है। इस मकान में रहकर उसका बेटा भूपेंद्र (14) कस्बे के चित्रगुप्त इंटर कालेज में कक्षा नौ में पढ़ता था। टोला रावत गांव से राठ की दूरी करीब 15 किलोमीटर है। 17 अगस्त को भूपेंद्र राठ से साइकिल से गावं के लिए निकला।
रास्ते में उसका अपहरण कर लिया गाय। शाम को भूपेंद्र के मोबाइल से देवपाल के मोबाइल पर काल आई। इसमें भूपेंद्र ने बताया कि वह कानपुर में है और पुलिस को कोई सूचना न दें। इसके बाद काल कट गई। देवपाल ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने छात्र के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर मोबाइल सर्विलांस पर लगाया तो लोकेशन गोहांड मिली। इसके बाद पुलिस बच्चे को खोजने की दुहाई देती रही। बुधवार को भूपेंद्र के ही मोबाइल से 15 लाख की फिरौती मांगी गई। उसके मोबाइल से मैसेज भी आया। देवपाल ने आर्थिक स्थिति का हवाला देकर इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई।
काल करने वाले पैसा लेकर कभी मानिकपुर तो कभी औरैया आने की बात कहीं। शुक्रवार को आई काल में 10 लाख की डिमांड की गई और पैसा लेकर महोबा के पनवाड़ी के पास आने की बात कही गई। परिजनों ने इस बात से भी पुलिस को वाकिफ कराया। इसी बीच शुक्रवार दोपहर गोहांड के खेत में बच्चे का शव मिला, जिसकी शिनाख्त भूपेंद्र के रूप में हुई।
पुलिस ने शव का पंचनामाभर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम के बाद देर शाम शव गांव में पहुंचा तो ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप लगाया कि पुलिस जांच पड़ताल की दुहाई देती रही। इसी बीच अपहरणकर्ताओं ने बच्चे की हत्या कर दी। तनाव को देखते हुए गांव में भारी संख्या में फोर्स तैनात कर दी गई है। डीआईजी ज्ञानेश्वर तिवारी का कहना है कि गांव में डीएम और एसपी मौजूद हैं। अपहरण की जानकारी उसी दिन मिल गई थी। कोशिश थी कि बच्चे को बिना किसी तरह का नुकसान हुए छुड़ा लिया जाए। इसके लिए लगातार दबिश भी दी गई, लेकिन दुर्भाग्य से बच्चे को बचाया नहीं जा सका। अपहरणकर्ताओं को हर हाल में पकड़ा जाएगा।