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मरीजों को घंटों इंतजार के बाद मिलता इलाज

Tue, 30 Jun 2015 12:30 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
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नियत पदों के सापेक्ष आधे पदों पर चिकित्सकों की तैनाती होने पर सरकारी चिकित्सा का लाभ यहां के बाशिंदों को नहीं मिल पा रहा है। वहीं ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने के लिए मरीजों को घंटों लाइन लगाकर समय की बर्बादी करनी पड़ती है। साथ ही दुर्घटना में घायल व अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को चिकित्सकों के अभाव में कानपुर के लिए  रिफर कर दिया जाता है। ताज्जुब है कि जिला अस्पताल में एक भी फिजीशियन नहीं है। जबकि आसपास के कई पड़ोसी  जिलों के लोग इलाज के लिए आते हैं। आंखों का इलाज एक नेत्र सहायक द्वारा किया जा रहा है। नियम से यहां 25 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। मगर मौजूदा में मात्र 13 चिकित्सक ही मरीजों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सोमवार की दोपहर मुख्यालय स्थित दीवान शत्रुघ्न सिंह जिला पुुरुष चिकित्सालय जाकर अमर उजाला टीम ने जांच पड़ताल की। पेश है एक रिपोर्ट
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महिला-पुरुष के लिए एक ही काउंटर
पर्चा बनाने वाले काउंटर में पर्चा बनवाने के लिए तीमारदारों की खासी भीड़ लगी थी। इस वक्त यहां करीब 500 लोगों ने पर्चे बनवा लिए थे। जल्दी से जल्दी पर्चा बन जाए, इसके लिए लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़े जा रहे थे। एक ही खिड़की से पुरुष व महिलाएं दोनों ही पर्चे बनवा रहे थे। महिलाओं के लिए अलग से खिड़की या अलग से लाइन की व्यवस्था न होने से धक्का मुक्की का भी शिकार होना पड़ रहा था।

इंजेक्शन लगाने का कर रहे थे इंतजार
टीम इंजेक्शन कक्ष का जायजा लेने पहुंची जहां एक स्टाफ नर्स रैबीज व जनरल इंजेक्शनों के लगाने का कार्य कर रही थी। कक्ष के अंदर दस मरीज व बाहर बरामदे में दस मरीज इंजेक्शन लगवाने का इंतजार कर रहे थे। स्टाफ नर्स ने बताया कि अब तक रैबीज के 25 और 35 जनरल इंजेक्शन लगा चुकी हैं। अकेले की वजह से मरीजों को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है। बताया कि इसी के साथ रजिस्टर को भी भरना करना पड़ता है। बताया कि एक इंजेक्शन एक ही व्यक्ति पर प्रयोग कर उसे निष्क्रिय कर दिया जाता है।
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नेत्र सहायक के भरोसे सबकी आंखें
टीम नेत्र विशेषज्ञ कक्ष पहुंची। जहां करीब दो दर्जन से अधिक मरीज व तीमारदार एक नेत्र सहायक को घेरे थे। गौरतलब हो कि अर्से से यहां नेत्र सर्जन का पद का रिक्त है। एक नेत्र सहायक ही मरीजों को अपनी सुविधाएं दे रहा है। वहीं मेड़िकल रिपोर्ट बनवाने वालों की भी खासी भीड़ रही। नेत्र सहायक ने बताया कि रोजाना करीब एक सैकड़ा मरीज आते हैं। जिनका  परीक्षण के बाद इलाज किया जा रहा है।

मरीज थे कम, कर रहे थे गपशप
12:50  बजे इमरजेंसी वार्ड के निरीक्षण में देखा कि यहां तीन मरीज बुखार से पीड़ित थे। जो वार्ड में पड़े बेडों में लेटे थे। एक मरीज सो रहा था, जबकि दो मरीजों के पास उनके तीमारदारों की भीड़ मिली। वही इमरजेंसी कक्ष में मरीजों के न होने से चिकित्सक भी अपने स्टाफ के पास बैठकर गपशप करते मिले।

सीएमएस डॉ.डीके माहुर ने कहा कि  25 में से 13 चिकित्सक ही मरीजों का इलाज कर रहे हैं। अस्पताल में फिजीशियन, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, स्किन, चेस्ट फिजीशियन नहीं हैं।

जिसके कारण मरीजों को काफी परेेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चिकित्सिकों की कमी की भरपाई के लिए उनके द्वारा प्रत्येक सप्ताह पत्राचार किया जा रहा है। नर्सिंग स्टाफ को बढ़ाने के लिए पत्र लिखा गया है।
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